फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rampur Bushahar News: घटना से परंपरा के साथ सुरक्षा पर उठे सवाल

विज्ञापन
विज्ञापन
शांत, भूंडा जैसे अनुष्ठानों में हथियारों के साथ चलना शान और परंपरा का प्रतीक
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। कुलगांव में देवता शालू महाराज के अनुष्ठान में हुए दुखद हादसे ने जहां एक परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया, वहीं सदियों पुरानी देव परंपराओं और बदलते समय के बीच संतुलन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़े देव आयोजनों, खासकर शांत भूंडा जैसे अनुष्ठानों में ‘खूंद’ परंपरा के तहत हथियारों के साथ चलना लंबे समय से शान और परंपरा का प्रतीक माना जाता रहा है।
बुजुर्गों के अनुसार पहले ऐसे आयोजनों में सीमित संख्या में ही बंदूकें होती थीं। अधिकतर लोग डंडे, तलवार और दराट जैसे पारंपरिक हथियारों के साथ देवता के सम्मान में शामिल होते थे। उस समय यह परंपरा नियंत्रित और मर्यादित दायरे में होती थी। बदलते समय और आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ आधुनिक हथियारों की संख्या बढ़ती गई, जो अब चिंता का विषय बन रही है।
विज्ञापन

जिन हथियारों के लाइसेंस आत्म सुरक्षा या फसलों की रक्षा के लिए दिए जाते हैं, उनका उपयोग अब धार्मिक आयोजनों में भी होने लगा है। कानून के अनुसार सार्वजनिक स्थानों और आयोजनों में हथियारों का प्रदर्शन या उपयोग प्रतिबंधित है। इसके बावजूद परंपरा और प्रतिष्ठा के नाम पर यह प्रचलन जारी है।
देवता शालू मंदिर कमेटी के मोतमीन उत्तम चंद पपटू ने कहा कि कानून सर्वोपरी है। समय के साथ परंपराओं में बदलाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि पहले खूंद शान के लिए हथियारों के साथ चलते थे, लेकिन वर्तमान समय में सुरक्षा और कानून का पालन सर्वोपरि होना चाहिए।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि यह घटना पूरे समाज के लिए चेतावनी है। अब समय आ गया है कि लोग परंपरा और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसे आयोजनों में हथियारों के उपयोग से परहेज करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें