रोहड़ू। रोहड़ू में सेब के बगीचों में सामान्य समय पर फूल आने के बजाय कई स्थानों पर पत्तियां निकलने के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे निचले क्षेत्रों के कई बगीचों में पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ने के रूझान आने शुरू हो गए हैं। विशेष रूप से कम और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में समस्या अधिक देखने को मिल रही है। बागवानों का कहना है कि तापमान में असामान्य उतार-चढ़ाव, समय से पहले गर्मी का बढ़ना, आजकल फिर तापमान में कमी और सर्दियों में पर्याप्त ठंड न पड़ना इसके मुख्य कारण हैं। सेब के पेड़ों को एक निश्चित अवधि तक सुषुप्तावस्था में ठंडे तापमान की आवश्यकता होती है, जो इस बार पूरी नहीं हो पाई। अब आजकल मापमान एक मानक पर रहना जरूरी होता है, लेकिन बारिश और खराब मौसम के कारण दिन के समय धूप, बारिश और रात को अधिक ठंड फूल को प्रभावित कर रही है। बागवानों के अनुसार, पिछले वर्ष समय से पहले पतझड़ होने के कारण इस बार पेड़ों का प्राकृतिक चक्र भी प्रभावित हुआ है। कई बागवानों का मानना है कि पिछले साल अत्यधिक पैदावार भी इस बार कम उत्पादन का एक कारण बन सकती है, क्योंकि पेड़ों को संतुलन बनाने के लिए सही वातारण पिछले साल के सेब तुड़ान के बाद नहीं मिल सका। रोहड़ू, ठियोग, जुब्बल और कोटखाई क्षेत्रों के कई बागवानों का अनुमान है कि यदि फूल ही कम आएंगे तो फल भी कम लगेंगे, जिससे उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा। कुछ बागवानों की राय है कि जलवायु परिवर्तन के चलते पिछले कुछ वर्षों से ऐसे बदलाव लगातार देखने को मिल रहे हैं। उद्यान विकास अधिकारी रोहड़ू यशवंत बगींटा का कहना है कि बागवानों को अब बदलते मौसम के अनुसार नई तकनीकों और वैकल्पिक फसलों की ओर भी ध्यान देना चाहिए। साथ ही उचित प्रबंधन, सिंचाई और पोषक तत्वों के संतुलन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में मौसम स्थिर नहीं होता है, तो इस वर्ष कम से मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्र तक सेब उत्पादन में गिरावट तय मानी जा रही है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था और बागवानों की आजीविका पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।