. मध्यम ऊंचाई वाले सेब बहुल इलाकों में पिंकबड स्टेज में सेब के बगीचे
. हर साल प्रकृति की मार झेल रहे बागवान, छाई मायूसी
संवाद न्यूज एजेंसी
डंसा (रामपुर बुशहर)। नोगवैली के मध्यम ऊंचाई वाले सेब बहुल क्षेत्रों में बागवानी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में सेब के बगीचे पिंकबड स्टेज में हैं। बागवानों को सालभर की मेहनत पर पानी फिरता दिख रहा है। मौसम के अचानक बदलाव से सेब की टहनियों में फूल की जगह सीधे पत्ते आ रहे हैं। कहीं फूल आने भी शुरू हो चुके हैं, लेकिन खराब मौसम के चलते तापमान में गिरावट आई है। इससे सेब की सेटिंग पर सीधा असर पड़ता है। बागवानों के लिए ओलावृष्टि भी बड़ा संकट बन गई है। सोमवार को नोगवैली और आसपास के क्षेत्रों में दोपहर बाद बारिश का दौर शुरू हुआ। बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक 25 फीसदी फूल आने पर बागवानों को दवाइयों का छिड़काव करना चाहिए और साथ ही मधुमक्खियों के बॉक्स बगीचे के इर्द-गिर्द स्थापित करने चाहिए ताकि फूलों की सेटिंग पर्याप्त मात्रा में हो सके। बागवानों में गोवर्धन, हिम्मत सिंह, जगत सिंह, पवन, बंसी लाल, गोविंद, सूरज, प्रकाश, घनश्याम, श्याम मुरारी, यशपाल और सुंदर सिंह का कहना है कि प्रकृति की चौतरफा मार के चलते हर साल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसके एवज न तो समय पर दवाइयां, न ही सरकार और विभाग की तरफ से कोई सहायता मिलती है। बागवानों को महंगे दामों पर बाजार से दवाइयां और अन्य बागवानी उपकरण खरीदने को बाध्य होना पड़ता है। बागवानी और राजस्व विभाग का काम कागजी कार्रवाई तक सीमित रहता है। धरातल पर कुछ भी अमल नहीं होता। बहरहाल, मौसम की मार के कारण बागवानों की परेशानी बढ़ी हुई है।