रोहड़ू। हिमाचल सरकार का बजट दिशाहीन और खोखले वादे वाला है। यह बजट मजदूर, कर्मचारी और पेंशनर विरोधी है। बजट का आकार गत वर्ष से चार हजार करोड़ घटाया गया है। बजट भाषण में मुख्यमंत्री ने कई स्थानों पर बचत करने की घोषणा की है, लेकिन अब देर हो चुकी है। यह बात राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रभारी विपिन डोगरा सहित ने कही। डोगरा ने कहा कि बजट के इंतजार में बैठे कर्मचारी, पेंशनर और मजदूर वर्ग को गहरा झटका लगा है। मुख्यमंत्री की इंतजार करो की नीति से अब जनता अपने को ठगा हुआ महसूस कर रही है। राष्ट्रीय राज्य संघ के अखिल भारतीय मंत्री चमन लाल कलवान, पेंशनर महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष इंद्र ठाकुर, प्रदेश महामंत्री बृज लाल शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र भंगालिया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राम लाल शर्मा, मुख्य सलाहकार नंद लाल शर्मा, उपाध्यक्ष राजेंद्र चौहान, रतन ठाकुर, तिलक शर्मा, अनिल गुप्ता, दाता राम, बाल कृष्ण ठाकुर, गोविंद नेगी, राजेंद्र हरदस्टा, जीवन सिंह समटा, देश राज पठानिया, राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष नरेश ठाकुर, प्रदेश महामंत्री उमेश कुमार और प्रदेश सह महामंत्री नरेश शर्मा ने कहा कि बजट में कर्मचारीयों, पेंशनरों के महंगाई भत्ते की किस्तों, वर्ष 2016 से संशोधित वेतनमानों के बकाया एरियर, लंबित मेडिकल बिलों के भुगतान का प्रावधान नहीं किया गया है। इससे कर्मचारियों और पेंशनरों में रोष व्याप्त है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार परिवहन व पर्यटन निगम में जो निजीकरण की नीति बना रही है ये भी प्रदेश व कर्मचारी हित में नहीं हैं।