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Rampur Bushahar News: तापमान के उतार-चढ़ाव से फ्लावरिंग का संतुलन बिगड़ा

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कहीं जल्दी तो कहीं देरी से फूल आने से बढ़ी चिंता
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चिलिंग ऑवर्स पूरे न होने और तापमान बदलाव का असर
परागण प्रभावित होने से उत्पादन घटने की आशंका
निचले क्षेत्रों में फसल पर ज्यादा असर संभव
विशेषज्ञों ने निगरानी और प्रबंधन पर दिया जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। इस बार मौसम के बदलते मिजाज का असर बागवानी पर नजर आ रहा है। तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण सेब के बगीचों में फ्लावरिंग का संतुलन बिगड़ गया है। आमतौर पर एक क्रम में होने वाली प्रक्रिया इस बार असमान रूप से हो रही है। इससे बागवानों की चिंता बढ़ गई है।
5 से 8 हजार फुट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फूल निकलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह सामान्य वर्षों की तुलना में असंतुलित है। कहीं समय से पहले फूल आ रहे हैं तो कहीं देरी हो रही है। इससे फसल के समग्र विकास पर असर पड़ सकता है। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार इसका मुख्य कारण पर्याप्त चिलिंग ऑवर्स का पूरा न होना और उसके बाद अचानक तापमान में वृद्धि है। साथ ही दिन और रात के तापमान में अधिक अंतर भी फ्लावरिंग को प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फूल एक समान नहीं खिलते, तो परागण (पोलिनेशन) प्रभावित होता है और फल बनने की प्रक्रिया कमजोर पड़ सकती है।
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इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर निचले क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। उद्यान विकास अधिकारी यशवंत बगींटा के अनुसार कम ऊंचाई वाले इलाकों में इस बार उत्पादन घटने की आशंका है। वहां आवश्यक ठंड के घंटे पूरे नहीं हो पाए। वहीं मध्य और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थिति कुछ हद तक बेहतर रह सकती है, लेकिन वहां भी तापमान का उतार-चढ़ाव चुनौती बना हुआ है।
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विशेषज्ञों ने बागवानों को सलाह दी है कि वे बगीचों की नियमित निगरानी करें। पोषक तत्वों की पूर्ति तथा रोग प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।
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