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Rampur Bushahar News: दिल्ली में हिमाचल के बागवानी विभाग के स्टॉल को मिला प्रथम पुरस्कार

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एग्री एवं हॉर्टिकल्चर एक्सपो में प्रदेश की बागवानी विविधता को मिली राष्ट्रीय पहचान
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सेब सहित कई विशिष्ट फल प्रदर्शित कर चमकाया नाम
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। दिल्ली में 23 से 25 अक्तूबर तक आयोजित इंडिया एग्री, ऑर्गेनिक हॉर्टी एंड टेक एक्सपो 2026 में हिमाचल प्रदेश सरकार के बागवानी विभाग के स्टॉल को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एक्सपो के तीसरे और अंतिम दिन मिली इस उपलब्धि से प्रदेश की समृद्ध बागवानी विरासत, फल उत्पादन की विविधता और आधुनिक बागवानी तकनीकों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। एक्सपो में हिमाचल प्रदेश की ओर से डॉ. बीएस नेगी, उपनिदेशक उद्यान, डॉ. सुरेश नेगी, विषय वस्तु विशेषज्ञ (बागवानी), डॉ. संतोष मेहता और डॉ. प्रवीण मेहता उद्यान विकास अधिकारी रामपुर ने भाग लिया। बागवानी विभाग की ओर से लगाए गए स्टॉल में जीआई टैग प्राप्त हिमाचली सेब के साथ ब्लूबेरी, ड्रैगन फ्रूट, एवोकाडो, कीवी, सीबकथॉर्न, मशरूम, विभिन्न प्रकार के मेवे और अन्य विशिष्ट बागवानी उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इनके माध्यम से हिमाचल प्रदेश की विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियों में फल उत्पादन की संभावनाओं और बागवानी में विविधीकरण के महत्व को दर्शाया गया। उद्यान विकास अधिकारी रामपुर डॉ. प्रवीण मेहता ने कहा कि प्रदर्शनी की मुख्य अवधारणा फल उत्पादन को बढ़ावा देने और बागवानी आधारित आजीविका को सशक्त बनाने पर केंद्रित रही। इसके तहत आधुनिक उत्पादन तकनीकों, नवीन फल प्रजातियों, मशरूम उत्पादन और बागवानी से जुड़े स्वरोजगार के अवसरों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। साथ ही गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और फसल विविधीकरण के माध्यम से बागवानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं को भी प्रदर्शित किया गया। विभाग का उद्देश्य प्रदेश की विशिष्ट बागवानी पहचान को व्यापक मंच प्रदान करने के साथ आधुनिक तकनीकों और नवाचारों को प्रोत्साहित करना रहा। ऐसे आयोजनों से देशभर में विकसित हो रही नई तकनीकों की जानकारी प्राप्त करने और उन्हें हिमाचल प्रदेश के बागवानों तक पहुंचाने के अवसर मिलते हैं। एक्सपो में प्रथम पुरस्कार मिलना प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे हिमाचल के विशिष्ट फलों और बागवानी उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने के साथ फल उत्पादन में विविधीकरण, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और बागवानी आधारित आजीविका को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने के प्रयासों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
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