संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। करीब चार महीने तक चले लंबे सूखे के बाद हुए हिमपात और बारिश ने क्षेत्र की बागवानी को संजीवनी दी है। मौसम में आए इस बदलाव से मिट्टी में नमी लौट आई है, जिससे बागवानों के चेहरों पर रौनक दिखाई देने लगी है।
सेब सहित अन्य फलदार पौधों के लिए यह समय बेहद अहम माना जाता है। अब नए बगीचे लगाने की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। हिमपात के बाद तापमान में गिरावट और मिट्टी में पर्याप्त नमी के कारण बागवान बगीचों में गोबर की खाद और अन्य जैविक उर्वरक डालने का काम शुरू कर सकते हैं। नमी मिलने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और पौधों की जड़ों को आवश्यक पोषक तत्व मिल सकेंगे।
लंबे सूखे के कारण पिछले महीनों में बागवानी कार्य लगभग ठप पड़ गया था और सिंचाई के संसाधन भी सीमित हो गए थे, लेकिन अब मौसम ने साथ दिया है। बागवानों का कहना है कि यदि यह नमी कुछ समय तक बनी रहती है तो आने वाले मौसम में पौधों की बढ़वार बेहतर होने की उम्मीद है। कई क्षेत्रों में बागवान गड्ढे तैयार कर नए पौधे लगाने की योजना बना रहे हैं। साथ ही पुराने बगीचों में निराई-गुड़ाई, खाद डालना और मिट्टी सुधार जैसे कार्यों को भी गति मिलेगी। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, अब मौसम खुलने के बाद बगीचों में गोबर और सड़ी-गली खाद डालने के लिए सबसे उपयुक्त समय है।
हिमपात के बाद मिट्टी में नमी होने से गोबर, वर्मी-कम्पोस्ट और जैविक उर्वरक आसानी से घुलकर जड़ों तक पहुंचते हैं। इससे पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और आने वाले मौसम में फूल और फल बेहतर होते हैं। बागवान रासायनिक खाद का प्रयोग सीमित रखें। मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का चयन करें। नए बगीचे लगाने से पहले भूमि की अच्छी तरह तैयारी करें। जल निकासी का ध्यान रखें और स्थानीय जलवायु के अनुकूल किस्मों का चयन करें।
-डॉ. उषा शर्मा, कृषि एवं बागवानी विशेषज्ञ