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Rampur Bushahar News: दो जिलों के फेर में फंस कर रह गई ज्यूरी वाया फांचा श्रीखंड महादेव यात्रा

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ज्यूरी वाया फांचा इस वर्ष भी नहीं हो पाएंगे श्रीखंड महादेव के दीदार। संवाद
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वर्ष 2014 से यात्रा पर प्रदेश सरकार ने लगाई है रोक, ज्यूरी वाया फांचा मार्ग को दो वर्ष पूर्व प्रशासन ने किया असुरक्षित घोषित श्रीखंड पहुंचने के लिए वाया फांचा करीब 15 किलोमीटर कम तय करना पड़ता है सफर
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प्रशासन ने मार्ग पर डंगे, पुलिया और हट बनाने के लिए भेजा है प्रस्ताव, नहीं मिला बजट

सुभाष सेन

रामपुर बुशहर। उन्नू महादेव ज्यूरी से वाया फांचा इस वर्ष भी श्रीखंड महादेव यात्रा को हरी झंडी नहीं मिल पाई है। दो जिलों कुल्लू और शिमला के फेर में फंसी इस यात्रा पर बंदोबस्त की कमी के कारण इस वर्ष भी हजारों शिवभक्तों को निराशा हाथ लगी है। साल 2014 से सरकार ने इस यात्रा पर प्रतिबंध लगाया है। हजारों श्रद्धालुओं की बार-बार की मांग के बाद भी यहां से यात्रा बहाल नहीं हो पाई है। गौर हो कि जिला कुल्लू के 18 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड महादेव के लिए वर्ष 2006 से ज्यूरी स्थित उन्नू महादेव से श्रीखंड के लिए छड़ी यात्रा शुरू की गई थी, जो वर्ष 2014 तक ही चली। उसके बाद प्रदेश सरकार ने इस मार्ग होकर यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया था। दो वर्ष पूर्व स्थानीय प्रशासन ने वाया फांचा होकर श्रीखंड जाने वाले मार्ग को असुरक्षित घोषित कर दिया था। हालांकि, यात्रा शुरू करने की बार-बार मांग उठती रही। प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन को कई मर्तबा लोगों ने इस यात्रा को शुरू करने की गुहार लगाई।
इस मार्ग से श्रीखंड महादेव की दूरी बागीपुल की अपेक्षा करीब 15 किलोमीटर कम है, जिससे यात्री दो दिन में ही अपनी यात्रा पूरी कर सकते हैं। वहीं, बात करें बागीपुल की, तो यहां से यात्रा पूरी करने में चार दिन का समय लगता है। ज्यूरी वाया फांचा यात्रा शुरू करवाने के लिए क्षेत्र के युवाओं को ट्रैकिंग का प्रशिक्षण भी दिया गया था, लेकिन यात्रा शुरू नहीं हो पाई। उक्त मार्ग पर अधिक जोखिम बना रहता है। अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान मनाली ने भी इस मार्ग से यात्रा शुरू करने के लिए इन्कार किया था। बीते वर्ष प्रशासन, पुलिस और पर्यटन विभाग की संयुक्त टीम ने इस मार्ग का निरीक्षण भी किया था। मार्ग पर डंगे लगाने, दो पुलियों का निर्माण, दो हट बनाने को लेकर रामपुर प्रशासन ने प्रस्ताव सरकार को भेजा है। इस यात्रा का मार्ग जिला शिमला और कुल्लू से होकर श्रीखंड पहुंचता है। कुल्लू प्रशासन का सहयोग न मिलने के कारण इस यात्रा को हरी झंडी नहीं मिल पाई है। वर्षों से हजारों श्रद्धालु इस यात्रा को शुरू करने की मांग उठा रहे हैं, लेकिन इस वर्ष भी यात्रा शुरू नहीं हो पाएगी और श्रद्धालुओं को वाया बागीपुल होकर ही भोले के दीदार करने होंगे।
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मार्ग को असुरक्षित घोषित किया
दो वर्ष पूर्व प्रशासन ने ज्यूरी वाया फांचा होकर श्रीखंड महादेव के मार्ग को असुरक्षित घोषित किया है। संयुक्त विभागों की टीम ने उक्त मार्ग का निरीक्षण किया था, जिसके बाद मार्ग में डंगे, पुलिया और दो हट बनाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा था। बजट के अभाव में कार्य शुरू नहीं हो पाया है। यदि जिला प्रशासन कुल्लू सहयोग करे तो इस यात्रा को शुरू किया जा सकता है। -निशांत तोमर एसडीएम रामपुर
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