47 हेक्टेयर मलकियत भूमि में की जा रही खेती, 120 से 130 क्विंटल होता है उत्पादन
नरेंद्र सिंह को पारंपरिक स्वदेशी फसल अवॉर्ड से नवाजा
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर के शौंग गांव में कई वर्षों से काले जीरे की खेती की जा रही है। काला जीरा खेती के ग्रामीणों के अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। काले जीरे के उत्पादन के लिए हाल ही में दिल्ली में काला जीरा उत्पादक संघ के प्रधान नरेंद्र सिंह नेगी को आउटलुक एग्री टैक समिट स्वराज अवाॅर्ड-2024 से सम्मानित किया गया है। नरेंद्र सिंह ने कहा कि काला जीरा पहले जंगलों में पाया जाता था। करीब 1985 से 1990 के बीच हमारे पूर्वजों ने छोटे स्तर पर काले जीरे की खेती शुरू की। धीरे-धीरे वर्ष 2000 तक सभी ने थोड़ी-थोड़ी खेती कर पूरे गांव में चार-पांच हेक्टेयर भूमि पर काला जीरे की खेती की। काला जीरा की खेती को बढ़ावा देने और समस्याओं के समाधान के लिए संगठित होकर ग्रामीणों ने वर्ष 2011 में काला जीरा उत्पादक संघ शौंग का गठन किया। संघ के प्रयासों से ग्रामीणों को जागरूक किया गया। वर्तमान में काला जीरा की खेती शौंग गांव में लगभग 47 हेक्टेयर मलकियत भूमि में की जा रही है। काला जीरा की खेती सेब के बगीचे और खाली भूमि पर की जाती है। संघ और ग्रामीणों ने शेष 36 हेक्टेयर मलकियत भूमि पर भी काला जीरा की खेती करने का लक्ष्य रखा है। गांव में फसल अच्छी होने पर 120 से 130 क्विंटल, फसल कम होने पर 40 से 50 क्विंटल तक काले जीरे का उत्पादन होता है। उन्होंने कहा कि काले जीरे का व्यापार सीमित होने के कारण और बिचौलियों की मनमानी से किसानों का शोषण हो रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि फल-सब्जी मंडी और अनाज मंडी की तर्ज पर काला जीरा के खरीद की भी व्यवस्था होनी चाहिए। एमएसपी सरकार की ओर से तय किया जाना चाहिए।
मिल चुके कई सम्मान
संघ प्रधान नरेंद्र सिंह ने बताया कि काला जीरा उत्पादक संघ को वर्ष 2018 में जीआई टैग मिला था। काला जीरा के उत्पादन के लिए 12 सितंबर, 2023 में राष्ट्रपति से पादप जीनोम संरक्षक समुदाय पुरस्कार मिला था, जिसमें संघ को 10 लाख रुपये की राशि, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया था। 26 सितंबर, 2023 को कृषि विज्ञान केंद्र किन्नौर और डॉ. यशवंत सिंह परमार विश्वविद्यालय की ओर से रिकांगपिओ में आयोजित किसान मेला एवं प्रदर्शनी में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने उत्कृष्ट किसान के स्मृति चिह्न से सम्मानित किया था। 11 जनवरी, 2024 को आईसीएआर के स्थापना दिवस पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग संस्थान लुधियाना ने प्रगतिशील किसान अवाॅर्ड और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किय था।
औषधीय गुणों से भरपूर है काला जीरा
काले जीरे में पाचन संबंधी, गैस्ट्रिक, पेट फूलना, पेट दर्द, दस्त, सिर दर्द, बुखार और अनिद्रा जैसे सभी प्रकार के पेट संबंधी विकारों को दूर करने के औषधीय गुण हैं। काले जीरे की कीमत की बार करें तो बाजार में इसकी कीमत 15 सौ रुपये से 19 सौ रुपये प्रति किलो तक होती है।