गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिए नहीं जाना पड़ेगा शिमला और बड़े शहरों की ओर
सीबीएसई मान्यता मिलने से सरकारी स्कूलों में शैक्षिक परिदृश्य के नए अध्याय की होगी शुरुआत
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)। चौपाल और नेरवा के शैक्षिक परिदृश्य में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है। 42 दिन के शीतकालीन अवकाश के बाद जब स्कूल के द्वार खुले, तो नजारा बदला हुआ दिखा। सीबीएसई मान्यता मिलने की खबर ने अभिभावकों में ऐसा उत्साह भरा कि स्कूल परिसर में प्रवेश लेने के लिए सुबह से ही छात्रों की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
भीड़ को नियंत्रित करने और दाखिला प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए प्रधानाचार्य ने विशेष कमेटियों की तैनाती की है। चौपाल और नेरवा स्कूल में दाखिले की प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए स्कूल प्रशासन ने गाइडलाइंस जारी की हैं। विद्यालय के पुराने छात्रों को प्रवेश में प्राथमिकता दी जाएगी। नए आवेदकों को पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर सीटें मिलेंगी। नवमीं कक्षा के लिए प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और विभागीय मानकों के अनुसार होगी। स्कूल ने भाषा के माध्यम को लेकर एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। कक्षा एक से छह तक पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम में रहेगी। कक्षा 7 से 9 तक के छात्रों को फिलहाल हिंदी और अंग्रेजी माध्यम का विकल्प भी मिलता रहेगा, ताकि वे धीरे-धीरे नए पैटर्न में ढल सकें।
प्रधानाचार्य चौपाल हरी शर्मा और नेरवा के प्रधानाचार्य दिनेश स्टेटा ने कहा कि सीबीएसई से जुड़ना केवल एक बोर्ड का बदलाव नहीं है, बल्कि बच्चों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने का एक मिशन है। हमारा बुनियादी ढांचा अब अंतरराष्ट्रीय मानकों को टक्कर देने के लिए तैयार है। अब छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिमला या अन्य बड़े शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा।