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बागासराहन को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए 110 बीघा भूमि की हुई निशानदेही

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आनी (कुल्लू)। आउटर सिराज के ऐतिहासिक पर्यटन स्थल बागा सराहन को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए पर्यटन विभाग ने पहले चरण का कार्य शुरू कर दिया है। बागा सराहन के 140 बीघा प्लॉट में से 110 बीघा भूमि की राजस्व विभाग की ओर से निशानदेही की गई। शुक्रवार को बर्फ के बीच राजस्व और वन विभाग की टीम ने पूरी भूमि की निशानदेही कर ततीमा काट दिया है, जिसके बाद अब डीपीआर बनाने के कार्य में तेजी लाई जाएगी। सरकार और पर्यटन विभाग यहां तमाम तरह की सुविधाएं देने के लिए खाका तैयार करने में जुट चुकी है ।
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प्रदेश के खूबसूरत क्षेत्रों को विकसित करने के उद्देश्य से सरकार और पर्यटन विभाग की महत्वाकांक्षी योजना नई राहें नई मंजिलें के तहत बागा सराहन को शामिल करने के बाद सरकार ने पर्यटन विभाग को आदेश दिए हैं। डीपीआर में बागा सराहन को उन तमाम तरह की सुविधाओं से लैस किया जाएगा, जिसकी पर्यटकों को मूलभूत आवश्यकता रहती है। पर्यटन की दृष्टि से जल्द इस क्षेत्र का कायाकल्प होने जा रहा है, इसके बाद न केवल इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से पंख लगेंगे, बल्कि क्षेत्र के बेरोजगार युवा भी अपने लिए स्वरोजगार के अवसर सुलभता से तलाश सकेंगे। प्रदेश भाजपा पर्यटन प्रकोष्ठ के कार्यकारिणी सदस्य प्रेम ठाकुर और भाजपा नेता विदेश निगम ने बागा सराहन को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का आभार जताया है।
वहीं, इस बारे जिला उपनिदेशक पर्यटन कुल्लू बीसी नेगी का कहना है कि बागा सराहन क्षेत्र की 110 बीघा भूमि का चयन किया है, जिसे सुविधाओं से विकसित किया जाएगा। अब बहुत जल्द डीपीआर बनाकर सरकार को भेजी जाएगी।
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क्या खास है बागा सराहन में
बागा सराहन क्षेत्र बहुत ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से बेहद खूबसूरत है। यहां पर्यटकों को निहारने के लिए करीब डेढ़ सौ बीघा का समतल मैदान है, जिसके चारों ओर घने देवदार से लदी सुंदर चोटियां हैं। मैदान के बीचोंबीच सर्प आकार में एक छोटी सी सुंदर और साफ झरना बहता है, जिसकी बहुत धार्मिक मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास का कुछ समय बागा सराहन में बिताया था और यहां भीम ने एक ही रात में इस विशाल बागे मैदान का निर्माण किया था। कौरव भी यहां पांडवों को ढूंढते-ढूंढते पहुंचे थे। कौरवों की ओर से बीजी गई धान की फसल आज भी यहां उगती है, जिस पर यहां के लोगों की विशेष मान्यताएं हैं।
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