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Rampur Bushahar News: सांगला बस अड्डा खतरे की जद में, आठ माह बाद भी सुरक्षा इंतजाम अधूरे

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सांगला में बस अड्डे को बना खतरा, एक वर्ष बाद भी नहीं हो पाया सुरक्षा कार्य शुरू। संवाद
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सितंबर 2025 की बारिश में धंसी सड़क, बस अड्डे की नींव कमजोर
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90 मीटर सड़क टूटने से बढ़ा खतरा
दो करोड़ की लागत से बना तीन मंजिला ढांचा संकट में
छितकुल संपर्क मार्ग पर बना अस्थायी पुल भी असुरक्षित
सुरक्षा दीवार निर्माण की मांग तेज
बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। पर्यटन स्थल सांगला में करोड़ों से बना बस अड्डा इन दिनों खतरे की जद में है। आपदा के आठ माह बीत जाने के बाद भी बस अड्डे को सुरक्षित करने के लिए कोई पुख्ता बंदोबस्त नहीं किए जा सके हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
गौर हो कि 2 सितंबर 2025 को भारी बारिश के चलते सांगला बस अड्डे के समीप सीमा सड़क संगठन की सड़क धंसनी शुरू हुई थी। इसके बाद 12 सितंबर को स्थिति और बिगड़ गई, जब बस अड्डे का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। एक ट्रक हवा में लटक गया था। इस दौरान करीब 90 मीटर सड़क टूट गई, जिससे बस अड्डे की नींव कमजोर हो गई और भवन को खतरा पैदा हो गया।
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करीब दो करोड़ रुपये की लागत से निर्मित तीन मंजिला बस अड्डा अब सीधे जोखिम में है। हैरानी की बात यह है कि आपदा के आठ माह बाद भी यहां सुरक्षा के लिए पक्की दीवार तक नहीं लगाई गई है। संबंधित विभाग और सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे बस अड्डा मरम्मत की बाट जोह रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बरसात से पहले सुरक्षा दीवार का निर्माण नहीं किया गया, तो बस अड्डा पूरी तरह ढह सकता है। इससे न केवल संपत्ति का नुकसान होगा, बल्कि लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। वहीं सांगला-छितकुल संपर्क मार्ग पर सीमा सड़क संगठन की ओर से नवंबर में लगाया अस्थायी पुल भी खतरे में है। इसे नुकसान पहुंचने की स्थिति में दुर्गम पंचायत छितकुल का संपर्क पूरी तरह कट सकता है। इसके अलावा आसपास का एक रिहायशी मकान भी जोखिम की जद में बताया जा रहा है।
व्यापार मंडल अध्यक्ष सांगला भूपेश नेगी, पूर्व प्रधान सांगला पंचायत देवसांकी नेगी, पूर्व प्रधान बटसेरी प्रदीप नेगी, पूर्व प्रधान रकछम टिकम नेगी, पूर्व प्रधान थेमगारंग मनोहर देवी नेगी, पूर्व प्रधान चांसू बीरबल लोक्ट्स, पूर्व प्रधान शौंग राम प्यारी नेगी और पूर्व उपप्रधान कामरू विजेंद्र नेगी ने सरकार, प्रशासन और विभाग से मांग की है कि बरसात से पहले बस अड्डे को सुरक्षित करने के लिए पक्की दीवार का निर्माण किया जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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सीमा सड़क संगठन के ओसी पोवारी अक्षय दुबे ने बताया कि डीपीआर तैयार कर स्वीकृति के लिए शिमला भेज दी गई है। स्वीकृति मिलते ही सुरक्षा दीवार लगाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
सीमा सड़क संगठन को समस्या से अवगत करवा दिया गया है। जल्द ही सुरक्षा दीवार लगाने की मांग उठाई गई है।
-अतुल गुप्ता, क्षेत्रीय प्रबंधक, एचआरटीसी
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