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Rampur Bushahar News: बगीचों की मेहनत पर अव्यवस्था की मार, अब सड़े सेब की दुर्गंध घोंट रही दम

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कोटखाई के कंवर बाग में जंगल के बीच डंप की गई सेब की बोरियां। संवाद
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कंवर बाग में डंप किए सड़े सेबों से जंगल को नुकसान, 40 देवदार और कायल के पेड़ सूखे
सड़े सेबों से क्षेत्र में फैली दुर्गंध, पर्यावरण पर पड़ रहा प्रतिकूल असर
एचपीएमसी की ओर से डंप की गई थीं सेब की बोरियां

संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)।
उपमंडल के बाग डुम्हार पंचायत में कंवर बाग क्षेत्र के पास जंगल में एचपीएमसी के डिपो की ओर से सेब की हजारों बोरियों डंप की गई थीं। अब यह सेब बोरियों में सड़ रहा है, जिससे निकलने वाले एसिड से आसपास का जंगल प्रभावित होने लगा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़ रहे सेब की वजह से क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। लोगों को आशंका है कि सड़े सेब से निकलने वाले एसिड के कारण कायल और देवदार के करीब 40 पेड़ सूख चुके हैं। अभी कई पेड़ों के लिए खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक लगभग 30 से 40 देवदार और कायल के पेड़ सूख चुके हैं, जबकि कई अन्य पेड़ भी सूखने के कगार पर हैं। स्थानीय लोगों कविंद्र कंवर,संदीप, विवेक और विनोद ने इस मामले को गंभीर पर्यावरणीय खतरा बताते हुए प्रशासन और वन विभाग से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। अब सवाल यह उठ रहा है कि वन विभाग इस पूरे प्रकरण पर क्या कदम उठाएगा और पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कौन जिम्मेदार होगा। बताया जा रहा है कि भारी बरसात के दौरान सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इसके चलते हिमाचल प्रदेश हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग कॉर्पोरेशन की ओर से बागवानोंं से खरीदे गए सेब की बोरियों को समय पर प्रोसेसिंग प्लांट तक नहीं पहुंचाया जा सका। बोरियों में सेब लंबे समय तक पड़े रहने से सड़ गए। फिर उन्हें वहीं जंगल में डंप किया गया, जिससे आसपास की भूमि और वन क्षेत्र प्रभावित हो गया।
अधिकारियों ने कहा
शाखा प्रबंधक एचपीएमसी भवानी ने कहा कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है उस समय इस पद पर कोई और अधिकारी थे ।
डीएफओ ठियोग मनीष रामपाल ने बताया कि विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया है। जो भी नुकसान हुआ, उसकी डैमेज रिपोर्ट तैयार करके जिम्मेदार लोगों को दी जाएगी।
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सड़े हुए सेब से निकलने वाला एसिटिक एसिड, अन्य कार्बनिक अम्ल और फफूंद मिट्टी की गुणवत्ता और पौधों की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। सड़न के दौरान बने कार्बनिक अम्ल मिट्टी को अधिक अम्लीय बना देते हैं। अत्यधिक अम्लीय पीएच होने पर जड़ों में पोषक तत्वों नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, कैल्शियम का अवशोषण कम हो जाता है, जिससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है। जड़ों पर विषाक्त प्रभाव एसिटिक एसिड अधिक मात्रा में होने पर जड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे पौधे का विकास रुकने और रोगों का खतरा बढ़ जाता है। -डाॅ. नरेंद्र कायथ, पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र शिमला।

कोटखाई के कंवर बाग में जंगल के बीच डंप की गई सेब की बोरियां। संवाद

कोटखाई के कंवर बाग में जंगल के बीच डंप की गई सेब की बोरियां। संवाद

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