समेज स्वास्थ्य संस्थान में बीते ढाई वर्ष से चिकित्सक और पांच वर्ष से फार्मासिस्ट का पद खाली होने से लोगों को झेलनी पड़ रही परेशानी
महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता के हवाले पीएचसी, ग्रामीणों में सरकार और विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर रोष
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। प्रदेश सरकार ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के दावे तो करती है, लेकिन धरातल पर उन दावों पर खरी नहीं उतर पा रही है। हालत यह है कि दुर्गम क्षेत्रों में ग्रामीणों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य केंद्र खोले गए हैं, लेकिन इन केंद्रों में स्टाफ की तैनाती न होने से मरीजों को भारी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। ऐसा ही मामला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र समेज में सामने आ रहा है। यहां स्टाफ की कमी की मार हजारों मरीजों पर पड़ रही है। चिकित्सक और फार्मासिस्ट का पद रिक्त होने से मरीजों को उपचार के लिए 17 किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ रही है। रामपुर उपमंडल के दुर्गम 15/20 क्षेत्र के समेज स्थित पीएचसी में ढाई वर्ष से डॉक्टरों का पद खाली पड़ा है। वहीं पांच वर्ष से अधिक समय से फार्मासिस्ट का पद रिक्त है। वर्षों से एकमात्र महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता के सहारे ही पीएचसी चल रहा है। स्टाफ की कमी के कारण दुर्गम क्षेत्र के ग्रामीणों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को मामूली सी बीमारी के उपचार के लिए रामपुर और खनेरी अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है। पीएचसी से समेज सहित आसपास के कई क्षेत्रों के ग्रामीण लाभान्वित होते हैं, लेकिन चिकित्सक और फार्मासिस्ट की तैनाती न होने से मरीज बेहाल हैं। सरपारा पंचायत के प्रधान मोहन लाल ने कहा कि पीएचसी में वर्षों से चिकित्सक और फार्मासिस्ट का पद रिक्त चल रहा है। क्षेत्र के मरीजों को प्राथमिक उपचार के लिए भी 17 किलोमीटर दूर का सफर तय करना पड़ रहा है। क्षेत्र के लोगों को घरद्वार की सुविधा नहीं मिल पा रही है। कई बार सरकार, प्रशासन और विभाग से समस्या दूर करने की गुहार लगाई गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।