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Rampur Bushahar News: सफेद चूर्णी रोग की चपेट में आए सेब के बगीचे

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विशेषज्ञों की सलाह, समय पर बागवान करें निदान नहीं तो फसल होंगी प्रभावित, पौधों का विकास भी रूकेगा
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सिस्टमैटिक फंगीसाइड का छिड़काव बीमारी से मिल सकती है निजात


संवाद न्यूज एजेंसी


रोहड़ू। सेब के बगीचे सफेद चूर्णी (पाउडरी मिल्डियू) रोग की चपेट में आ गए हैं। यह रोग लगभग सभी बगीचों में देखने को मिल रहा है। बागवानी विशेषज्ञों ने रोग से समय रहते बचाव की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार रोग अधिकतर नई पत्तियों, कलियों, हरी टहनियों पर लगता है। इस बीमारी से पौधों की पत्तियों पर सफेद पाउडर के धब्बे ऊपर और नीचे दोनों सतह पर उभरते हैं। उपयुक्त वातावरण होने पर रोग पत्तियों व नई हरी टहनियों तक फैल जाता है। संक्रमित पत्तियां मुड़कर सख्त हो जाती है। अधिक संक्रमण होने पर प्रभावित पत्तियां समय से पहले ही झड़ जाती है। इससे रोगग्रस्त शाखाओं की बढ़ोतरी रुक जाती है। संक्रमित कलिकाएं फल पैदा करने में सक्षम नहीं रहती।

ज्यादा संक्रमित टहनियां शीघ्र मर जाती है। फफूंद की आरंभिक बढ़ोतरी में नई टहनियों पर सफेद रंग का चूर्ण दिखाई देता है, जो बाद में बदलकर गहरे भूरे रंग का हो जाता है। सेब की परागण किस्में इस रोग से अधिक प्रभावित होती है। यह रोग पौधशालाओं में सबसे अधिक पनपता है। इस रोग के लिए पाडोस्फीरा ल्यूकोट्राइका नामक फफूंद जिम्मेवार होता है। इस फंफूद के कोनिडियम असंख्य मात्रा में वायु से वितरित होते हैं। इसका अंकुरण संतृप्त आपेक्षिक आद्रता और 10 से 25 डिग्री तापमान होने पर होता है।
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उद्यान विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ डा. संजय चौहान ने बताया कि इस रोग की रोकथाम के लिए सर्दियों में कांट छांट करते समय रोगग्रस्त शाखाओं को काटकर नष्ट कर देना चाहिए। जिस बगीचे में फूल झड़ चुके हैं। वहां पर सिस्टमैटिक फंगीसाइड दवाइयों के छिड़काव करके ही रोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है। बागवान अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं। समय रहते रोग का रोकथाम करना आवश्यक है।
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