विभाग बागवानों को दी जा रही लंबित अनुदान राशि का निपटारा करने में जुटा, पांच करोड़ की और जरूरत
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। बागवानी उपकरणों पर मिलने वाले अनुदान के लंबित मामलों को निपटाने के लिए उद्यान विभाग रोहड़ू को इस वर्ष करीब तीन करोड़ चार लाख रुपये का बजट प्राप्त हुआ। विभाग बागवानों के लंबित मामलों को क्रमवार निपटाने का कार्य कर रहा है। हालांकि राेहड़ू उपमंडल में अनुदान के लंबित मामलों को निपटाने के लिए विभाग को अभी भी करीब पांच करोड़ रुपये से अधिक के बजट की आवश्यकता है। रोहड़ू उपमंडल में उद्यान विभाग के पास एंटीहेल नेट, बांस स्ट्रक्चर, पावर स्प्रेयर, पावर ट्रिलर, ग्रेडिंग पैकिंग हाऊस पर बागवानों को मिलने वाले अनुदान के सैकड़ों मामले लंबित पड़े हैं। इस वर्ष विभाग को करीब 3 करोड़ रुपये का बजट अनुदान राशि आवंटित करने के लिए प्राप्त हुआ है। इसमें एंटी हेलनेट के लिए 1.30 करोड़ प्राप्त हुए। विभाग ने एंटी हेलनेट के लिए 150 बागवानों के मामलों को तकनीकी मंजूरी दे दी है। इसमें छह लाख रुपये की अनुदान राशि बागवानों को आवंटित कर दी गई है। बांस के स्ट्रक्चर के लिए 1.20 करोड़ रुपये की राशि विभाग को सरकार से मिली है। इसमें विभाग ने 512 बागवानों के मामलों को तकनीकी मजूंरी दी है। इसमें 70 लाख रुपये की अनुदान राशि बागवानों को आवंटित कर दी गई है। पावर टिलर के लिए 26 लाख रुपये की राशि मिली। इसमें 12.50 लाख रुपये की अनुदान राशि आवंटित कर दी गई है। पावर स्प्रेयर के लिए 6.50 लाख रुपये मिले है। इसमें चार लाख रुपये की अनुदान राशि बागवानें को जारी की जा चुकी है। वहीं ग्रेडिंग पैकिंग हाऊस के लिए 22 लाख रुपये का राशि सरकार से प्राप्त हुई है। इसमें 19 लाख रुपये की अनुदान राशि बागवानों आवंटित कर दी गई है। उद्यान विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ डाॅ. संजय कुमार ने बताया कि अनुदान राशि के मामलों को निपटाने के लिए इस वर्ष अच्छा बजट मिला है। हालांकि सभी मामलों को निपटाने के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता है। इसकी मांग विभाग के अधिकारियों के समक्ष रखी जाएगी। उद्यान विभाग में अनुदान के केस आना निरंतर प्रक्रिया है। इसलिए मामले लंबित भी रहते हैं। अब सभी केस आनलाइन ही जमा होते हैं। इसलिए मामलों को निपटाने में पुरी तरह से पारदर्शिता रहती है।