हर वर्ष दूसरे स्कूलों में दाखिला लेने को मजबूर छात्र-छात्राएं, अहम विषयों के पद खाली
अभिभावकों ने प्रदेश और शिक्षा विभाग से खाली पदों को भरने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर के दुर्गम स्कूलों में सरकार और शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली विद्यार्थियों पर भारी पड़ रही है। कई स्कूलों में बीते लंबे समय से शिक्षकों का अभाव है, ऐसे में विद्यार्थियों को पढ़ाई करने के लिए मजबूरन अन्य स्कूलों का रूख करना पड़ रहा है। इससे अभिभावकों पर अधिक आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में बेहतर शिक्षा मुहैया करवाने के दावे तो करती है लेकिन धरातल पर यह दावे खोखले साबित हो रहे हैं। ऐसा ही एक मामला किन्नौर जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शोंग में भी सामने आया है। स्कूल में प्रधानाचार्य, टीजीटी नॉन मेडिकल, टीजीटी मेडिकल और डीपीई का पद खाली चल रहा है। शिक्षकों के अभाव में स्कूल से प्रति वर्ष छात्र दूसरे स्कूलों में दाखिला लेने को मजबूर है। इस वर्ष स्कूल में करीब 47 छात्र-शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। प्रतिवर्ष छात्रों की घटती संख्या चिंता का विषय बना हुआ है। स्कूल में प्रधानाचार्य का पद चार अप्रैल, 2022 से रिक्त पड़ा हुआ है। वहीं टीजीटी नॉन मेडिकल नौ फरवरी, 2018, टीजीटी मेडिकल चार अगस्त, 2017 और डीपीई का पद सात नवंबर, 2022 से खाली है। ऐसे में जहां विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर है, वहीं अभिभावकों को भी बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है। प्रधान शोंग पंचायत रामप्यारी नेगी, उप्रपधान गंगा सिंह नेगी, राजू नेगी, सुभद्रा नेगी, रेखा नेगी, राजेश नेगी और सुमित्रा नेगी सहित अन्य अभिभावकों ने कहा कि स्कूल में शिक्षकों की कमी से बच्चों की पढ़ाई खासी प्रभावित हो रही है। उन्होंने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से जल्द खाली पदों को भरने की मांग उठाई है, जिससे घरद्वार पर बच्चों का भविष्य संवर सके। उच्च शिक्षा विभाग किन्नौर के उपनिदेशक सुरेंद्र नेगी ने कहा कि खाली पदों को लेकर समय-समय पर सरकार से पत्राचार किया जा रहा है। सरकार द्वारा नए शिक्षकों की भर्ती की जानी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शीघ्र खाली पदों को भरा जाएगा।