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Rampur Bushahar News: पशु पालन विभाग किन्नौर में स्टाफ का टोटा, पशुपालक परेशान

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लंपी रोग के कारण जिले में कई पशुओं की हो चुकी हैं मौत, खाली पदों को भरने की उठाई मांग
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संवाद न्यूज एजेंसी

रिकांगपिओ (किन्नौर)। किन्नौर जिले में लंपी रोग से जिले में करीब 173 पशुधन की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद पशुपालन विभाग में पिछले कई सालों से स्वीकृत पद खाली चल रहे हैं। इस वजह से विभाग को पशुओं के उपचार में कई तरह की दिक्कतें आ रही हैं वहीं पशुपालक भी परेशान हैं। पशुपालन विभाग में 90 विभिन्न पद कई सालों से खाली चल रहे हैं जबकि 200 विभिन्न पदों की स्वीकृति होने पर 110 पदों पर अधिकारी और कर्मचारी काम कर रहे हैं। जिले के पशुपालकों ने प्रदेश सरकार से जल्द खाली पदों को भरने की मांग उठाई है। लंपी रोग की बात करें तो किन्नौर में 42 पशु इस रोग की चपेट में हैं। 2,038 पशु लंपी रोग के शिकार हुए थे। इसमें 1,823 पशु स्वस्थ हो चुके हैं। किन्नौर के विभिन्न सरकारी पशु अस्पतालों में 13 पशु चिकित्सकों के स्वीकृत पद कई सालों से खाली हैं। ज्ञाबुंग पंचायत में 23 साल से पशु चिकित्सक अधिकारी का पद खाली है। कटगांव में वर्ष 2016, स्पीलो में 2017, रूपी, जंगी और मूरंग में 2018, चगांव में 2021, सापनी में 2022, भावागनर, रिकांगपिओ और चांगो में 2023 से पशु चिकित्सक अधिकारी का पद रिक्त चल रहा है। किन्नौर के तीनों ब्लॉक कल्पा, निचार और पूह में मुख्य वेटरनरी फार्मासिस्ट के स्वीकृत तीन पद भी आज तक नहीं भरे गए हैं। किन्नौर में पशुपालन सहायक के कुल 18 स्वीकृत पद में से 13 कर्मचारी काम कर रहे हैं। पूह में सात में से तीन पद पर कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। जिले के तीनों खंडों में वेटरनरी फार्मासिस्ट के 66 पद स्वीकृत हैं लेकिन 34 पद कई सालों से खाली चल रहे हैं। सबसे ज्यादा कल्पा ब्लॉक में 22 पद स्वीकृत होने के बावजूद इसमें से 16 पद रिक्त हैं। कल्पा, निचार और पूह खंड में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 90 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 35 पद सालों से खाली पड़े हैं। इस वजह से पशुओं के उपचार में दिक्कतें आ रही हैं। इसका खामियाजा पशुपालकों को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से जिले में खाली पदों को भरने की मांग उठाई है। पशुपालन विभाग किन्नौर के उपनिदेशक डॉ. अजय नेगी ने बताया कि सरकार को हर माह खाली पदों की जानकारी भेजी जाती है। कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी से लंपी बीमारी के दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है फिर भी इस बीमारी पर काबू पाया गया है।
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