हजारों लोगों का स्वास्थ्य एक चिकित्सक के हवाले, स्टाफ की कमी की मार झेल रहे दुर्गम क्षेत्र के लोग
ग्रामीणों ने सरकार से चिकित्सक और फार्मासिस्ट का पद भरने की लगाई गुहार
बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर के आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रिब्बा में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। इस वजह से जिले के दुर्गम क्षेत्र के ग्रामीणों को बेहतर उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही है। करीब एक दर्जन पंचायतों के हजारों लोगों को लाभान्वित करने वाली पीएचसी महज एक चिकित्सक के हवाले है। ऐसे में ग्रामीणों को प्रदेश सरकार और विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर खासा रोष है। गौर हो कि पूह खंड के तहत आने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रिब्बा में चिकित्सकों के दो पद स्वीकृत हैं लेकिन यहां एक ही चिकित्सक सेवाएं दे रहा है। जबकि एक अन्य चिकित्सक का तबादला अगस्त, 2023 में हो चुका है। वहीं फार्मासिस्ट का पद भी 30 सितंबर, 2023 से रिक्त । ऐसे में हजारों ग्रामीणों को उपचार में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खाली पदों की मार चिकित्सक भी झेल रहे हैं। पूह खंड की रिब्बा पंचायत, रिस्पा, आकपा और स्कीबा पंचायतों के हजारों लोग पीएचसी से लाभान्वित होते हैं। पीएचसी एनएच के किनारे होने के कारण मूरंग, जंगी, रारंग, लिप्पा, आसरंग, कुन्नोचारंग, ठंगी और लंबर पंचायतों के हजारों लोग भी इसका लाभ उठाते हैं लेकिन एक चिकित्सक की सेवाएं मरीजों पर भारी पड़ रही है। मरीजों को उपचार के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं प्रधान रिस्पा राजेंद्र नेगी, कमल किशोर नेगी, अजय नेगी, जीतराम नेगी, महिला मंडल अध्यक्षा लीला देवी नेगी, पूर्व प्रधान रिस्पा पंचायत जिनेंद्र पाल नेगी, गजेंद्र नेगी और सुशील कुमार नेगी ने कहा कि चिकित्सक की सेवाओं से स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। वहीं एनएच पर पीएचसी स्थित होने के कारण कई अन्य पंचायतों के हजारों लोग लाभान्वित होते हैं। ऐसे में उन्होंने सरकार और विभाग से चिकित्सक और फार्मासिस्ट का रिक्त पद भरने की मांग उठाई है, जिससे दुर्गम क्षेत्र के ग्रामीणों को उपचार के लिए दर दर न भटकना पड़े। मुख्य चिकित्सा अधिकारी किन्नौर डॉ. सोनम नेगी ने कहा कि खाली पदों का मामला सरकार के ध्यान में है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही सरकार रिक्त पदों को भरेगी।