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Rampur Bushahar News: छह माह के बाद खुले छितकुल देवी माता मंदिर के कपाट

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पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर गुप्तराज मंदिर से मुख्य मंदिर में पहुंचीं माता, ग्रामीणों ने धूप-अगरबत्ती से किया स्वागत
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संवाद न्यूज एजेंसी

सांगला (किन्नौर)। हिमाचल प्रदेश देवभूमि के नाम से जानी जाती है और यहां कई देव परंपराएं हैं, जो सदियों से निरंतर चली आ रही हैं। जनजातीय जिला किन्नौर में भी देवी-देवताओं के प्रति लोगों में खासी आस्था है। देश के सीमांत क्षेत्र छितकुल में विराजमान देवी माता के प्रति श्रद्धालुओं में अपार श्रद्धा है। खास बात यह है कि श्रद्धालुओं को माता के दर्शन केवल मई से अक्तूबर तक ही होते हैं, जबकि नवंबर से अप्रैल तक मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। वीरवार को माता छह माह के बाद मंदिर से बाहर निकलीं और ग्रामीणों ने देव परंपरा की सदियों से चली आ रही रस्मों को निभाकर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। पारंपरिक परिधानों में सजधज कर ग्रामीणों ने माता को ढोल नगाढ़ों की थाप पर मुख्य मंदिर तक पहुंचाया। वाद्ययंत्रों की धुनों से समूचा छितकुल क्षेत्र भक्तिमय हो गया। भारत-तिब्बत सीमा से सटे देश के अंतिम गांव छितकुल स्थित देवी माता मंदिर के कपाट वीरवार को छह माह बाद श्रद्धालुओं के लिए खुले हैं। नवरात्र के तीसरे दिन माता मंदिर से बाहर निकली और ग्रामीणों को शुभ आशीर्वाद दिया। मंदिर कमेटी के सदस्यों ने बताया कि मई से अक्तूबर तक सैकड़ों श्रद्धालु देवी माता मंदिर के दर्शन करने यहां पहुंचते हैं, जबकि नवंबर से लेकर अप्रैल तक मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। वीरवार को माता देवी को गुप्तराज मंदिर से उनके मुख्य मंदिर लाया गया। ग्रामीणों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों और ढोल नगाढ़ों की धुनों पर माता को मंदिर से बाहर निकाला। पारंपरिक वेशभूषा में ग्रामीणों ने धूप अगरबत्ती से माता की पूजा अर्चना करके स्वागत किया। ग्रामीणों ने माता से वर्षभर गांव की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। उल्लेखनीय है कि यहां के ग्रामीण देवी माता छितकुल के आदेशानुसार पूरा सालभर का काम करते हैं। छितकुल देवी माता मंदिर के कपाट खुलने से अब देश और प्रदेश के सहित किन्नौर जिले के लोग दर्शन कर सकते हैं। छितकुल गांव प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। किन्नौर जिले के रमणीय और दार्शनिक स्थलों में छितकुल का नाम शामिल है।
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