रिकांगपिओ डिपो की 10 वर्ष पूरी कर चुकी 12 बसें दौड़ रही कई ग्रामीण रूटों पर
बार-बार आधे रास्ते में हांफ रही हैं बसें, यात्रियों को झेलनी पड़ रही परेशानियां
बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर के हजारों यात्रियों का सफर राम भरोसे है। जिले में जहां खटारा बसों में लोग जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। एचआरटीसी की यह बसें आधे रास्ते में हांफ रही है, जिससे यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गौर हो कि पथ परिवहन निगम डिपो रिकांगपिओ की 12 बसें 10 वर्ष का समय पूरा कर चुकी हैं। जीरो वैल्यू की यह बसें बार-बार कई स्थानों पर हांफ रही है। निगम प्रबंधन खटारा बसों को विभिन्न रूटों पर दौड़ाकर यात्रियों की जिंदगियों के साथ खिलवाड़ कर रहा है। खटारा बसों में कभी भी हादसा पेश आ सकता है। वहीं रोजाना कहीं न कहीं एचआरटीसी की बसें आधे रास्तों पर ही हांफ रही है। इससे यात्रियों को आवाजाही करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के विभिन्न ग्रामीण रूटों पर पथ परिवहन निगम ने खटारा बसों के सहारे परिवहन व्यवस्था चला रखी है, जो कभी भी किसी हादसे का कारण बन सकता है। 10 वर्ष पुरानी बसों को जिले के छितकुल, चांगो, बड़ा कंबा, निचार, बरी, रोघी, हांगो-चुलिंग, सुमरा, शलखर, कुन्नोचारंग और ठंगी सहित कई अन्य ग्रामीण रूटों पर चलाया जा रहा है। प्रधान रोघी पंचायत रत्न मंजरी नेगी, प्रधान हांगो सूरजमणी नेगी, प्रधान कल्पा सरिता नेगी, प्रधान शुदारंग दलीप नेगी, प्रधान दुनी दीवान नेगी, कोठी ओमप्रकाश नेगी, प्रधान ख्वांगी सत्या नेगी, दीपक नेगी, दिव्या नेगी और राजेश सहित अन्य ग्रामीणों ने सरकार से नई बसों की व्यवस्था करने की मांग उठाई है, जिससे लोगों को असुविधाओं का सामना न करना पड़े। पथ परिवहन निगम शिमला के डीएम पवन शर्मा का कहना है कि एचआरटीसी की कार्यशाला में बसों की नियमित मरम्मत जांच के बाद रूटों पर भेजा जाता है। अगर फिर भी कोई ऐसी समस्या पेश आ रही है, तो बसों को मरम्मत कर चलाया जाएगा।