रोहड़ू। हिमफेड मुख्य कार्यालय शिमला की ओर से रोहड़ू और चिड़गांव में बागवानों को जागरूक करने के लिए जागरुकता शिविरों का आयोजन हिमफेड के प्रबंध निदेशक ज्ञान सागर नेगी की अध्यक्षता में हुआ।
इसमें संबंधित क्षेत्रों के बागवानों, पंचायत प्रधानों, किसानों, बागवानों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। शिविर के दौरान किसानों और बागवानों को मंडी मध्यस्थता योजना के अंतर्गत नए निर्देशों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। इस दौरान हिमफेड के एमडी ज्ञान सागर नेगी ने हिमफेड की ओर से सेब सीजन के दौरान सी ग्रेड सेब की खरीद के लिए प्रदेशभर में खोले जाने वाले एकत्रीकरण केंद्रों के लिए जारी निर्देशों से अवगत करवाया।
उन्होंने बताया कि हिमफेड की ओर से खरीदे जाने वाले सी ग्रेड सेब को बागबान बोरी में अधिकतम 37 किलो भर सकते हैं। इससे बोरी में मौजूदा सेब विक्रय केंद्र तक सुरक्षित पहुंच सकेगा। उन्होंने बताया कि बागवान अपना कर्तव्य समझें कि वे इन बोरियों में गला सड़ा सेब न डालें क्योंकि बोरी में अगर सेब का एक दाना भी सड़ा पाया गया तो पूरी बोरी खराब हो जाती है। इससे हिमफेड को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सेब सीजन में बागवानों और एकत्रिकरण केंद्रों के एजेंट की ओर से विभिन्न प्रकार की मापतोल और अन्य नियमों की अनदेखी की शिकायतें आती हैं।
इसको देखते हुए हिमफेड ने अपर शिमला के कुछ केंद्रों को चयनित कर वहां पर निगरानी करने के लिए सीसीटीवी लगाने का निर्णय लिया है। इससे यहां होने वाली धांधलियों पर अंकुश लगाया जा सकेगा। एकत्रीकरण केंद्रों में बागवान गुणवत्तापूर्ण सेब लाना अपना कर्तव्य समझें। वहीं विभिन्न केंद्र प्रभारियों पर भी नकेल कसी जा सके, इसके लिए रोहड़ू और चिड़गांव विकास खंड सहित विभिन्न सेब बहुल क्षेत्रों की पंचायतों में होने वाली आमसभा में जागरुकता शिविर भी लगाए जाएंगे।