ओलावृष्टि ने बागवानों की तोड़ी कमर, सालभर की मेहतन पर फेरा पानी, बागवान बोले, आज तक नहीं देखी ऐसी ओलावृष्टि
तीन से पांच मिनट तक बरसे बड़े-बड़े ओले, बागवानों की मेहनत पर फिरा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। मौमस के बिगड़े तेवरों से बागवान खासे परेशान हैं। रोजाना कहीं न कहीं मौसम की बार बागवानों पर पड़ रही है। कभी ओलावृष्टि तो कभी अंधड़ से सेब फसल चौपट हो रही है। शनिवार दोपहर के बाद भी रामपुर उपमंडल में मौसम ने करवट बदली और सूबे की कंछीड़ घोड़ी में ओलावृष्टि ने कहर बरपाया। कंछीड़ घाटी में हुई ओलावृष्टि से बागवानों के होश फाख्ता हो गए। करीब तीन से पांच मिनट तक बरसे बड़े-बड़े ओलों ने बागवानों की सेब फसल बुरी तरह से तबाह कर दी है। कुरनू, नेहरा, नरैण, कड़ेली, ब्रांदली और बशड़ी सहित अन्य क्षेत्रों में ओलावृष्टि ने बागवानों ने कमर तोड़ कर रख दी है। क्षेत्र के प्रगतिशील बागवान हीरा राणा, लोकेंद्र ठाकुर, रोनी चौहान, सुनील और राजीव सहित अन्य बागवानों ने बताया कि ओलावृष्टि से सेब फसल बुरी तरह से प्रभावित हुई है। ओले इतने बड़े-बड़े थे कि आज तक दशकों से ऐसी ओलावृष्टि नहीं हुई थी। करीब 50 से 100 ग्राम वजन के ओले बरसे। इतनी खतरनाक और भयानक ओलावृष्टि उन्होंने कभी नहीं देखी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में इन दिनों अंतिम चरण की फ्लावरिंग का दौर जारी है। ऐसे में कुदरत ने फिर से बागवानों पर कहर ढाया है। सालभर की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से ओलावृष्टि से हुए नुकसान का आकलन करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से उचित मुआवजा देने की गुहार लगाई है।