संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। रोहड़ू की जुब्बल तहसील के पाराऊंठी गांव के लोगों को नया साल कभी न भूलने वाले जख्म दे गया। देश-दुनियां में जहां लोग नववर्ष के जश्न में डूबे थे, वहीं गांव के दस परिवारों के पास न घर बचा था और न ही जरूरत का कोई सामान। आग में दस परिवारों के पास केवल तन पर पहने कपड़े ही बचे हैं। पांटा परिवार के काष्ठकुणी शैली से बने पुश्तैनी एतिहासिक घर इस अग्निकांड में राख के ढेर में तबदील हो गए हैं। लकड़ी से बने इन घरों में इतनी भयानक आग लगी की दमकल विभाग की टीम के प्रयास भी विफल हो गए। लोगों ने बताया कि नए साल की खुशी में सभी प्रभावित परिवार रात एक बजे घरों में आराम कर रहे थे। इस दौरान एक परिवार को धुएं से घुटन का आभास हुआ। बाहर निकल कर देखा तो पूरा घर आग की चपेट में आ चुका था। उन्होंने किसी तरह से भागकर अपनी जान बचाई। इसके बाद उन्होंने परिवारों को भी बाहर भागने के लिए आवाजें लगाना शुरू किया लेकिन लकड़ी से बने घरों में कुछ ही समय में आग पूरी तरह से फैल गई। इससे मौके पर अफरा तफरी मच गई। सूचना के बाद दमकल वाहन में पहुंचे पर आग पर काबू पाने का प्रयास किया। आग लपटे इतनी भयंकर थी कि पानी की बौछारों का असर नजर नहीं आ रहा था। सुबह सात बजे आग को आसपास फैलने से किसी तरह से रोका जा सका लेकिन इस घटना में दस परिवार पूरी तरह बेघर हो गए। अब हालत यह है कि सर्दियों के दिनों में कई परिवारों के पास सिर ढकने के लिए छत तक नहीं बची है। कुछ परिवार बगीचों में बने अस्थायी घरों में शरण लेने को मजबूर है। घटना के बाद सोमवार को पूरा दिन प्रभावितों से मिलने के लिए आसपास के गांव से लोगों पहुंचते रहे। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक अग्निकांड में करीब पांच करोड़ रुपये नुकसान का आकलन है। एसडीएम जुब्बल राजीव सांख्यान ने कहा कि वे सूचना के बाद पूरी रात घटना स्थल पर थे। पांच दमकल वाहनाें की मदद से आग पर काबू पाया गया। दस परिवारों को फौरी राहत दी गई है।