संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। हिमाचल सरकार की ओर से संशोधित वेतनमानों और महंगाई भत्ते के एरियर की जारी अधिसूचना का कर्मचारी संघ ने कड़ा विरोध किया है। राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष विपन कुमार डोगरा और हिमाचल प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रदेश संगठन मंत्री बृजलाल शर्मा ने बताया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार कर्मचारियों को गुमराह कर वोट हथियाने के लिए चुनावी स्टंट है। डोगरा ने कहा चुनाव से पूर्व लोक लुभावने वायदे कर सता में पंहुची सुक्खू सरकार अब कर्मचारी वर्ग की ही उपेक्षा कर रही है। वित्तीय संकट का राग अपनाने वाली सरकार फिजूलखर्ची में चेयरमैनों, सलाहकारों और ओएसडी के अनावश्यक पदों को भर रही है। 16 से संशोधित वेतनमानों के बकाया एरियर की एक किस्त पूर्व भाजपा जयराम ठाकुर सरकार ने अदा करने का कर्मचारी नेताओं ने विरोध किया था। आज कुछ कर्मचारी नेता अपने राजनीतिक स्वार्थ के कारण चुप्पी साधे हुए हैं। सरकार ने चुनाव में लाभ लेने के लिए यह दाव चला है। सरकार ने इस अधिसूचना को संशोधित करे अन्यथा कर्मचारी सरकार का पुरजोर विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिसूचना के अनुसार एरियर के पूर्ण भुगतान में 10-12 वर्ष लगेंगे। इसके आदेश करने वाले और सुझाव देने को भी हिसाब देखकर शर्म नहीं आ रही कि उन्हें किस परिस्थिति से गुजरना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पेंशनर सरकार से दुखी है। 2016 से संशोधित पेंशन, ऐरियर ग्रेच्युटी, लिव इनकैशमेंट ,जीआईएस और अन्य संशोधित लाभ नहीं दिए जा रहे हैं। कर्मचारी नेताओं ने कहा संशोधित वेतनमान के एरियर का भुगतान 2-3 किस्तों में देने का निर्णय सरकार ले। छोटे और चतुर्थ श्रैणी कर्मचारियों का एरियर एकमुश्त अदा किया जाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का आक्रोश एक संघर्ष के रूप में पूरे प्रदेश में उठेगा। जो कर्मचारी नेता अपने स्वार्थ के कर्मचारी विरोधी निर्णय का समर्थन कर रहे हैं उनको भी कर्मचारी वर्ग के विरोध का सामना करना पड़ेगा।