मिट्टी की जांच करवाएं बागवान, बगीचा लगाने से पहले विशेषज्ञ से लें सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। बागवान सेब के पौधे रोपने के लिए बारिश और हिमपात की इंतजार कर रहे हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि नई किस्म के सेब का बगीचा तैयार करने के लिए वैज्ञानिक तरीका अपनाएं। बागवान बगीचे की रूपरेखा तैयार करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें। गलत तरीके से सेब का बगीचा लगाने पर फल की गुणवत्ता और पौधे का विकास प्रभावित होता है। बारिश के बाद इस महीने से मार्च तक बगीचे लगाने का उपयुक्त समय रहता है। सेब का बगीचा लगाने से पहले स्थान का चयन, वहां का जलवायु का पता होना जरूरी है। इसके बाद बागवानों को तय करना होगा कि यहां के लिए सेब की किन किस्मों को उपयुक्त माना जाए। बागवानों को इसकी प्राथमिक जानकारी होना जरूरी है। बगीचे की रूपरेखा बनाने से पहले वहां की मिट्टी की जांच करवाना भी जरूरी है। कृषि विज्ञान केंद्र के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक एवं बागवानी विशेषज्ञ डॉ नरेंद्र कायथ ने बताया कि सेब के लिए मिट्टी दोमट उपजाऊ और मिट्टी की पीएच 6.0 से 7.0 के बीच अच्छी मानी जाती है। भूमि के भीतर की सतह पथरीली नहीं होनी चाहिए। बगीचा किस विधि से लगाया जा सकती यह भूमि की ढलान पर निर्भर करता है। उनका कहना है कि अगर भूमि समतल हो तो बगीचा वर्गाकार आयताकार विधि से लगता है। ढलानदार भूमि पर बगीचा कंटूर विधि से लगना चाहिए। छोटे-छोटे खेत हो तो सेब के पौधों को उपयुक्त दूरी पर टैरेस बनाकर लगाया जाता है। खेतों की ढलान अंदर की ओर हो, जिससे पानी जमीन में रहे। इससे सूखे के समय पौधे को कम नुकसान होता है। उन्होंने सलाह दी कि पौधे से पौधे की दूरी सेब की किस्म पर निर्भर करती है। पौध लगाने से पहले गड्ढे बनाने का काम पूरा करें। डाॅ. कायथ का कहना है कि गड्ढे का आकार भूमि की उपजाऊ क्षमता पर निर्भर करता है। आमतौर पर गड्ढा एक मीटर के आकर का बनाया जाता है। पौधे लगाने से एक महीने पहले गड्ढे भरना जरूरी है। गड्ढे में गली सड़ी गोबर की खाद और आधा किलो सुपर फासफेट खाद डालें। गलत तरीके से बगीचा लगाने पर बागवानों को भविष्य में नुकसान उठाना पड़ता है।