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Rampur Bushahar News: मौसम की बेरूखी से बगीचों में तौलिए बनाने और खाद डालने का काम रुका

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एक माह से बारिश नहीं होने से बढ़ी बागवानों की मुश्किलें, अगले साल की फसल हो सकती है प्रभावित
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संवाद न्यूज एजेंसी



रोहड़ू। बीते एक माह से बारिश नहीं होने से सेब के बगीचे सूखे की चपेट में आ गए हैं। बगीचों से नमी गायब होने के कारण पौधों में तौलिए बनाने और गोबर व खाद डालने का काम लटक गया है। इससे अगले साल फल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। समय से बारिश औरबर्फबारी न हुई तो सेब की फसल के जरूरी चिलिंग ऑवर्स पूरे नहीं होने से भी उत्पादन गिर सकता है। सेब के बगीचों में काटछांट का काम पूरा करने के बाद बागवान गोबर और अन्य उर्वरकों को बगीचों में डालने का काम शुरू करते हैं लेकिन इसके लिए जमीन में नमी होना जरूरी है। समय पर खाद और गोबर के मिट्टी में मिलने से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती और जड़ें भी मजबूत होती हैं। सेब की अच्छी फसल के लिए दिसंबर में नमी के साथ तापमान 15 डिग्री से कम होना चाहिए। फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान का कहना है कि बारिश-बर्फबारी न होने से सूखे के कारण खाद डालने का काम रुक गया है। इस साल दिसंबर का पूरा महीना सूखा निकल गया है। बागवानी विशेषज्ञ डाॅ नरेंद्र कायथ का कहना है कि सूखे से खाद डालने का काम प्रभावित हो रहा है। इससे कैंकर जैसी बीमारी बगीचों में बढ़ने का खतरा रहता है। अब वूली एफिड का खतरा है। फल की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। तापमान की अधिकता से फसल पर नकारात्मक असर पड़ता है। पूर्व उद्यान विकास अधिकारी डाॅ अग्रदास ने बताया कि इस साल ठंड जरूर अधिक है लेकिन नमी पर्याप्त नहीं है। सेब की पुरानी किस्मों के पौधों के लिए सात डिग्री से कम तापमान के 1,200 घंटे तक चिलिंग ऑवर्स की जरूरत रहती है। चिलिंग ऑवर्स पूरे न होने का असर फ्लावरिंग पर पड़ता है। पौधों में एक समान फ्लावरिंग नहीं होती। कमजोर फ्लावरिंग से फूल पर फल नहीं लगते। इससे सेब उत्पादन के प्रभावित होने का खतरा रहता है।
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