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Rampur Bushahar News: न नियमों पर अमल न जांच, मौत का बम बन रही रसोई गैस की आंच

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न जांच न नियमों पर अमल, गैस सिलिंडर बन रहे मौत का बम
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रामपुर में 12 साल पहले घर-घर जाकर एजेंसियों ने सिलिंडर की जांच की, तीन साल में जरूरी निरीक्षण
सुरक्षा को लेकर उपभोक्ताओं से लेकर गैस एजेंसियां तक लापरवाह
एक गैस कनेक्शन पर केवल दो सिलिंडर, कई घरों में अधिक रखे हैं
सोलन और सिरमौर जिले में रसोई गैस सिलिंडर के फटने से 14 लोगों की जान चली गई
सुभाष सेन
रामपुर बुशहर।
सोलन और सिरमौर जिले में रसोई गैस सिलिंडर के फटने से 14 लोगों की जान चली गई। इस दुर्घटना से पूरा प्रदेश दहल उठा, वहीं सुरक्षा के नियमों की भी पोल खोलकर रख दी। प्रदेश में बढ़ती आग की घटनाओं को घातक बनाने में गैस सिलिंडर एक मुख्य कारण बनता जा रहा है। आग की घटनाओं के वक्त गैस सिलिंडर किसी बम से कम नहीं। सिलिंडर से सुरक्षा को लेकर उपभोक्ताओं के साथ गैस एजेंसियां तक लापरवाही बरत रहे हैं। घरों में मानकों के हिसाब से न गैस सिलिंडर रखे जा रहे और न ही सावधानियों को लेकर उपभोक्ता जागरूक हैं। गैस एजेंसियां भी नियम के हिसाब से इसकी जांच नहीं कर पा रहीं। ऐसे में रसोई गैस सिलिंडर के कारण जोखिम काफी बढ़ जाता है। न नियमों पर अमल और न जांच होने के कारण रसोई गैस सिलिंडर की आंच मौत का बम बन रही है। रामपुर और साथ लगते क्षेत्रों की बात करें, तो यहां आखिरी बार करीब 12 साल पहले घर-घर जाकर एजेंसियों की ओर से रसोई गैस सिलिंडरों की जांच की गई थी। नियमों के मुताबिक एजेंसियों को तीन साल में घर-घर जाकर गैस सिलिंडर की जांच करनी होती हैं। स्थानीय एजेंसी के अनुसार जांच से संबंधित फार्म कंपनी से उनके पास नहीं पहुंच रहे हैं, जिस कारण यह जांच नहीं हो पा रही है। एक गैस कनेक्शन पर केवल दो सिलिंडर ही दिए जाते हैं, लेकिन अधिकतर घर ऐसे हैं, जहां विभाजन होने से कई कनेक्शन दिए गए हैं। इससे घरों में सिलिंडरों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। एक गैस उपभोक्ता को दो से अधिक सिलिंडर रखना गैरकानूनी है।
घरों में मानकों के हिसाब से नहीं रखे जा रहे गैस सिलिंडर
मानकों की बात करें, तो रसोई में एक साथ दो सिलिंडर नहीं रख जा सकते, लेकिन लगभग सभी घरों में ऐसा ही हो रहा है। गैस सिलिंडर के पास फ्रिज, स्टोव, प्लास्टिक, कपड़ा, मिट्टी का तेल, पेट्रोल या अन्य ज्वलनशील पदार्थ रखना भी जाखिम भरा है। ग्रामीण इलाकों में परंपरागत लकड़ी के चूल्हे आज भी इस्तेमाल हो रहे हैं। इन चूल्हों के साथ सिलिंडर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। मानकों के अनुसार, लकड़ी का चूल्हा और सिलिंडर भी एक रसोई में नहीं होने चाहिए। उपभोक्ताओं के साथ गैस एजेंसियां भी लापरवाही बरत रही हैं।
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दो फायर टेंडर के सहारे दो उपमंडल
आग लगने की स्थिति में रामपुर और निरमंड उपमंडल के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में रामपुर शहर से दमकल की गाड़ियां मदद करने पहुंचती हैं। दुर्गम क्षेत्र 15/20, 12/20, सराहन, ननखड़ी, निरमंड और नित्थर उपतहसील के लिए भी रामपुर से आग बुझाने के लिए टीम रवाना होती है। अग्निशमन विभाग रामपुर के पास आग से निपटने के लिए एक छोटा और एक बड़ा दमकल वाहन है, जो क्षेत्रफल के मुताबिक काफी कम है। रामपुर के तैनात एक अन्य बड़ा दमकल वाहन अपनी अवधि पूरा कर चुका है। ऐसे में विभाग की ओर से एक और बड़े दमकल वाहन की मांग की गई है।

घोषणाओं तक सिमटे अग्निशमन केंद्र
रामपुर और निरमंड उपमंडल में हर साल आग लगने की घटनाएं पेश आती हैं, लेकिन आग से निपटने के पुख्ता इंतजामों की आज भी कमी है। पूर्व भाजपा सरकार के समय रामपुर के ज्यूरी, ननखड़ी और निरमंड में अग्निशमन केंद्र और चौकियां खोलने की घोषणाएं हुईं, जिससे क्षेत्र के लोगों को आपदा के समय जल्द राहत मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद अग्निशमन केंद्र खोलने की घोषणा केवल राजनीतिक मंचों तक सिमट कर रह गई है। उपमंडल निरमंड में आग की घटनाएं पेश आने पर 17 किलोमीटर दूर रामपुर से मदद पहुंचती है। जब तक दमकल के वाहन बचाव के लिए पहुंचते हैं, तब तक सब कुछ जलकर राख हो जाता है। उपमंडल की 23 पंचायतों के लिए आज दिन तक आग की घटनाओं से निपटने के लिए ठोस इंतजाम नहीं हो पाए हैं। बीते वर्ष अगस्त माह में शिल्ली पंचायत के शैदरी गांव में आठ कमरों का मकान जल गया था। इसके बाद बीते दिसंबर में कतमोरी गांव में दो मंजिला मकान आग की भेंट चढ़ गया, लेकिन रामपुर से जब तक दमकल वाहन पहुंचे, तब तक मकान राख की ढेर में बदल गए थे। यहां प्रशासन ने अब तक अग्निशमन केंद्र के लिए केवल जमीन तलाशी है। अग्निशमन केंद्र कब खुलेगा और लोगों के इसका लाभ कब मिलेगा। इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।
आनी में फायर पोस्ट में मिनी वाटर टेंडर की कमी बनी चुनौती
आनी स्थित फायर पोस्ट में वर्तमान में दो दमकल वाहन उपलब्ध हैं, जिनमें एक बड़ा और एक एक छोटी गाड़ी शामिल है। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और संकरी सड़कों को देखते हुए मिनी वाटर टेंडर की अनुपलब्धता दमकल विभाग के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। आनी क्षेत्र पहाड़ी और दुर्गम इलाकों से घिरा हुआ है, जहां अधिकतर गांवों और बस्तियों तक पहुंचने के लिए छोटी संपर्क सड़कें उपलब्ध हैं। ऐसी सड़कों पर बड़े दमकल वाहन का पहुंचना कई बार संभव नहीं हो पाता है, जिससे आग लगने की स्थिति में समय पर राहत कार्य प्रभावित होता है। छोटी गाड़ी में पर्याप्त मात्रा में पानी न होने के कारण आग पर तुरंत काबू पाना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

ये हुईं बड़ी घटनाएं
शिमला जिले के चौपाल उपमंडल में तीन जनवरी की रात को रसोई गैस का सिलिंडर फटने से एक नेपाल मूल के व्यक्ति की मौत हो गई थी। यह हादसा चौपाल के साथ लगते देवत क्षेत्र में पेश आया था। वहीं, बीते वर्ष 12 अक्तूबर को रामपुर के शनेरी स्थित मंदिर भी आग की चपेट में आने से जलकर राख हो गया था। यहां करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से बना मंदिर आग की भेंट चढ़ गया था।

आनी में मिनी वाटर टेंडर की अत्यंत आवश्यकता है। यदि एक मिनी वाटर टेंडर उपलब्ध हो जाए, तो संकरी सड़कों, दूरदराज के गांवों, घनी आबादी वाले क्षेत्रों और वनों में आग बुझाने का कार्य कहीं अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। - सतीश वर्मा, प्रभारी, फायर पोस्ट आनी

उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर के इस्तेमाल और सावधानियों के बारे में समय-समय पर जागरूक किया जाता है। जल्द ही क्षेत्र में घर-घर में जाकर गैस सिलिंडरों की जांच सुनिश्चित की जाएगी। एक गैस कनेक्शन पर केवल दो ही सिलिंडर रखे जा सकते हैं। - मधु, प्रभारी, गैस एजेंसी रामपुर
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निरमंड में अग्निशमन केंद्र खोलने के लिए जमीन तलाशी गई है। संयुक्त विभागीय टीम ने निरीक्षण भी कर लिया है। जल्द ही अग्निशमन केंद्र खोल दिया जाएगा। - मनमोहन सिंह, एसडीएम निरमंड
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