सेब समेत स्टोन फ्रूट के पौधे लगाने के लिए उपयुक्त मौसम
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बर्फबारी के बाद अब बगीचों के प्रबंधन कार्य शुरू कर पाएंगे बागवान रूट रॉट रोग से बचाव के लिए जड़ों को खाली करने और फिर पेस्टिंग की दी सलाह संवाद न्यूज एजेंसी रामपुर बुशहर। प्रदेश में सेब उत्पादन के क्षेत्रफल का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। आधुनिकता के दौर में सेब की किस्मों में कई बदलाव हुए हैं, जो कम और मध्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी अच्छी फसल दे रहे हैं। अब बर्फबारी और बारिश के बाद नई पौध लगाने के लिए मौसम अनुकूल है। मध्य और कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 15 फरवरी से पहले सेब की पौध लगाने का उपयुक्त समय है। बागवानी विभाग ने क्षेत्र के बागवानों को इस अवधि में नए पौधे लगाने की सलाह दी है। साथ ही बागवान अपने बगीचों में प्रबंधन कार्य, खाद डालने और पौधों की बीमारियों की रोकथाम के कार्य भी अब कर सकते हैं। प्रदेश की आर्थिकी में सेब उत्पादन करीब पांच हजार करोड़ रुपये का सहयोग देता है। सेब उत्पादन के क्षेत्र में लगातार विस्तार हो रहा है, जो आगामी समय में ग्रामीणों की आर्थिकी मजबूत करने के साथ-साथ प्रदेश में आय के संसाधन बढ़ाएगा। सरकारी और निजी स्तर पर बागवानी को बढ़ावा देने का कार्य जोरों से चल रहा है। शुरुआती दौर में जहां ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ही सेब उत्पादन होता था, वहीं अब कम और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में भी सेब की पैदावार कर ग्रामीण अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं। सेब उत्पादन के लिए बर्फबारी और जमीन में नमी होना जरूरी है। बीते दिनों हुई बारिश-बर्फबारी से जमीन में पर्याप्त नमी आ गई है। अब बागवान सेब सहित अन्य स्टोन फ्रूट के नई पौध लगा सकते हैं। बागवानी विभाग ने 1500 से 2500-2700 मीटर ऊंचाई के दायरे में आने वाले क्षेत्रों में 15 फरवरी तक नए पौधे लगाने की सलाह दी है। इसके बाद पौधों में बड्स आने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इससे लगाए गए पौधों के सूखने का खतरा होता है। हालांकि, अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मार्च माह तक नए पौधे लगाए जा सकते हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और अधिक ठंड के कारण अभी गड्ढे बनाने और प्रबंधन के कार्य सही से नहीं हो पाते हैं। कम और मध्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब, नाशपाती, बादाम, चुल्ली, प्लम सहित अन्य स्टोन फ्रूट के पौधे फरवरी मध्य माह तक लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा बागवान सेब बगीचों में खाद डालने, गड्ढे बनाने और बगीचों के प्रबंधन का कार्य भी कर सकते थे। बीते माह जमीन में नमी न होने के कारण बागवान बगीचों में खाद नहीं डाल पा रहे थे। अब बारिश, बर्फबारी होने से प्रबंधन कार्यों सहित पौधों के रोगों की भी रोकथाम कर सकते हैं। यदि सेब के पौधों में रूट रॉट की समस्या है, तो बागवान इस मौसम में पौधे के तौलिये और जड़ों को खाली करें। इसके बाद जड़ों की पेस्टिंग की जानी चाहिए।
कम और मध्य ऊंचाई वाले इलाकों में सेब और अन्य स्टोन फ्रूट के पौधे लगाने के लिए यह उपयुक्त समय है। बागवान 15 फरवरी से पहले-पहले नई पौध लगाएं। सेब बगीचों के प्रबंधन और पौधों को रोगों से बचाव के लिए भी अभी कार्य किए जा सकते हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मार्च तक नए पौधे लगाए जा सकते हैं। डॉ. संजय चौहान, विषयवाद विशेषज्ञ, बागवानी विभाग रामपुर
बर्फबारी बारिश के बाद रामपुर में नए फलदार पौधे ले जाती ग्रामीण महिला। संवाद