किन्नौर में नन्हे मुन्हें बच्चों ने भी छेड़ा नो मींस नो, सेव किन्नौर अभियान।
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रामपुर बुशहर। किन्नौर जिले को प्राकृतिक आपदाओं और तबाही से बचाने के लिए जिले के लोगों की ओर से छेड़े गए नो मींस नो सेफ किन्नौर अभियान ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। प्रदेश के हर कोने में जहां भी किन्नौर के लोग रह रहे हैं, इस अभियान से जुड़ रहे हैं।
गौर हो कि किन्नौर जिले में आए दिन भूस्खलन से जिले के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। किन्नौर को तबाही से बचाने के लिए जिले के युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने जिले में बिजली परियोजनाओं के निर्माण पर रोक लगाने के लिए आवाज बुलंद की है।
उनका कहना है कि परियोजना के निर्माण से टनलें बनीं और खनन हुुआ है। ऐसे में जहां लोगों को खतरा बना हुआ है, वहीं जिले में प्राकृतिक जल स्रोत भी सूखने के कगार पर हैं। इससे आने वाले समय में पेयजल किल्लत से जूझना पड़ेगा। ऐसे में जिले के लोगों ने जमीनी स्तर और सोशल मीडिया पर किन्नौर के अस्तित्व को बचाने के लिए पहल शुरू की है।
जिले के युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं ने साफ शब्दों में कहा कि अब जिले में कोई भी जल विद्युत परियोजना का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए चाहे उन्हें कोई भी कुर्बानी देनी पड़े। परियोजनाओं के निर्माण से पहले ही स्थानीय लोगों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। प्राकृतिक जल स्रोत सूख रहे हैं, भूस्खलन होना आम बात हो गई, खतरे के साये में रोजाना सफर हो रहा है और जलवायु परिवर्तन इन बिजली परियोजनाओं के निर्माण से हुआ है।
मंजीत, सरिना, अंजु, सुमेश, कमल सहित अन्य लोगों ने कहा कि किन्नौर में कई परियोजनाएं बनाई गई हैं, जिससे पर्यावरण को खासा नुकसान पहुंचा है। जिले में प्रकृति से छेड़छाड़ करना भविष्य के लिए खतरा है। परियोजनाओं के निर्माण से जिला पहले ही खोखला बन चुका है।