संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। अधिक गर्मी के कारण मटर की फसल झूलस रही है, वहीं फल छेदक सुंडी फसल को तबाह कर रही है। इन दिनों बाजार में मटर के दाम कम मिल रहे हैं। वहीं, मटर की फली पर सुंडी की मार ने चिंता बढ़ा दी है। मटर की फसल के शुरू में दाम बेहतर रहे, लेकिन अब उत्पादन में भारी गिरावट से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। सूखे और सुंडी के प्रकोप से मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्र के किसानों की बीज और खाद की कीमत भी वसूल नहीं हो पा रही है। मटर में सूखा पड़ने व फूल झड़ने से उत्पादन में आई भारी कमी से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सुंडी कीट के प्रकोप से हरे मटर की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इससे उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। सुंडी कीट शुरुआत में पत्तियों को नुकसान पहुंचाता है। इसके बाद धीरे-धीरे फली को बर्बाद कर देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर इस कीट पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह उत्पादन में भारी गिरावट का कारण बन सकता है। किसानों के लिए जरूरी है कि वे सुंडी कीट के लक्षणों को पहचानें और समय पर उचित कदम उठाएं। मटर की फसल को सुंडी कीट से बचाना किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है, लेकिन सही समय पर उचित उपाय अपनाने से इस समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
अधिकांश लोग बागवानी के साथ कई स्थानों पर मटर तैयार कर रहे हैं। कुछ लोग मजदूरों से खाली जमीन पर मटर व अन्य बेमौसमी सब्जियों को तैयार करवा रहे हैं।
कीटनाशक से बचाएं फसल
कृषि एवं बागवानी विशेषज्ञ डाॅ. आग्रदास का कहना है कि कीटनाशक जैसे उपाय फसल को बचाने में कारगर साबित होते हैं। साथ ही जैविक उपायों को प्राथमिकता देकर फसल की गुणवत्ता और पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे फसल की देखभाल में सतर्कता बरतें और विशेषज्ञों की सलाह का पालन करें।