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भाजपा से बागवत कर पंकज परमार कांग्रेस से जिप अध्यक्ष बने

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पंकज परमार - फोटो : RAMPUR-HP
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आनी (कुल्लू )। न जोड़-तोड़ में माहिर न राजनीति का अनुभव लेकिन वक्त ने पंकज परमार के पक्ष में ऐसा खेल रचया कि बड़े-बड़े राजनीतिक महारथी धराशायी हो गए। दलाश के ढैर गांव के पंकज और उनका परिवार भाजपा से जुड़ा था।
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जब पार्टी ने समर्थन नहीं दिया तो वे निर्दलीय ही जिला परिषद चुनाव में कूद गए। बागी बनकर बिना किसी पार्टी के समर्थन से वे न सिर्फ जीते बल्कि भारी मतों से विरोधियों को चारों खाने चित कर दिया। उन्हाेंने कई विरोधियों की जमानत तक जब्त करा दी। पंकज की किस्मत ने ऐसे करवट बदली कि जिला परिषद की सरदारी कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के तौर पर उन्हें मिल गई। पंकज पहली बार चुनाव लड़े और सीधे जिला परिषद कुल्लू के अध्यक्ष का ताज सिर पर सज गया।
जिस जिला परिषद की सरदारी के लिए बड़े बड़े धुरंधर जोड़-तोड़ और चुनावी गणित को बिगाड़ने से भी नहीं हिचकते वो सरदारी पंकज परमार को कांग्रेस के आफर के चलते मिल गई। जोड़-तोड़ कांग्रेस ने की और पंकज के कांग्रेसी खेमे में जाने भर से ही काम हो गया।
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भाजपा ने जोड़-तोड़ की कोशिश की लेकिन सभी कोशिशें नाकाम रहीं। मूल रूप से भाजपा की विचारधारा से जुड़े व्यक्ति का बिना किसी पार्टी के समर्थन से चुनाव लड़ना फिर जीतना और जिला परिषद का अध्यक्ष बन जाना जनता के बीच चर्चा का विषय बना है। इससे आउटर सिराज की उम्मीदों को पंख लग गए हैं। इलाके के लिए खास ये भी है कि इस बार कोई भी जीतता अध्यक्ष की सरदारी आउटर सिराज को ही मिलती। अध्यक्ष पद के लिए दावा करने वाले तीनों प्रत्याशी आनी विधानसभा क्षेत्र से ही संबंध रखते हैं।
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