मौसम की मार से पीले पड़ रहे प्लम के दाने। संवाद
सर्दियों में सूखे की मार और बेमौसमी बारिश से गुठलीदार फलों की नहीं हुई सेटिंग
. पेड़ों में पीले पड़ रहे फल, बागवानों की बढ़ी परेशानी
. अंधड़ और ओलावृष्टि का भी सता रहा डर
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। उपमंडल रामपुर के निचले क्षेत्रों में गुठलीदार फलों पर मौसम की भारी मार पड़ी है। सर्दियों में सूखे की मार और बेमौसमी बारिश से प्लम के फलों की सेटिंग नहीं हो पाई है। इस बार प्लम की मात्र 15 से 20 प्रतिशत फसल के उत्पादन का अनुमान है। पेड़ों पर जो थोड़े बहुत फल लगे थे, अब वो भी पीले पड़ रहे हैं और जमीन पर गिर रहे हैं। इससे हजारों बागवानों की परेशानी बढ़ गई है। बागवानों को भारी आर्थिकी का झटका लग रहा है। रामपुर उपमंडल के निचले क्षेत्रों कोटगढ़, भद्राश, दत्तनगर, निरसू, तलाई, नोगली, स्विचयार्ड, मशेली, कुमसू, राजपुरा, गटोल, खनोटू, रचोली, गसो और रतनपुर सहित कई अन्य इलाकों में बागवानों की आर्थिकी का मुख्य जरिया प्लम की फसल है। हर साल बागवानों को मौसम की मार झेलनी पड़ रही है। बीते साल की अपेक्षा इस साल प्लम की फसल की पैदावार में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। सर्दियों में बारिश न होना, फ्लाॅवरिंग के दौरान तापमान लुढ़कना और बेमौसमी बारिश से फ्लॉवरिंग बुरी तरह से प्रभावित हुई है। बागवानों रजनीकांत शर्मा, भूपेंद्र चौहान, शेखर, किशोर, आनंद नेगी, रंजीत चौहान, शेर सिंह, सुरेंद्र कुमार, राधा कृष्ण और राकेश चौहान ने कहा कि मौसम अनुकूल न रहने के कारण प्लम की पैदावार में भारी गिरावट आई है। फलों की सेटिंग नहीं हो पाई है और जो फल पेड़ों पर लगे हैं, वो भी पीले पड़ रहे हैं। सर्दियों में पर्याप्त बारिश न होना और फ्लाॅवरिंग स्टेज पर बारिश और अंधड़ से उत्पादन हर साल प्रभावित हो रहा है। वहीं अब ओलावृष्टि और अंधड़ का डर भी सता रहा है। बेमौसमी बारिश और प्रतिकूल मौसम की मार से बागवानी संकट में हैं। वर्षभर की मेहनत बर्बाद हो रही है। कृषि और परिवार का खर्चा निकालना मुश्किल हो गया है। हर साल किसान और बागवान कुदरत की मार झेलने को मजबूर हैं। इस साल मात्र मात्र 15 से 20 प्रतिशत फसल उत्पादन का अनुमान है। यदि अंधड़ और ओलावृष्टि हुई तो कुछ भी हाथ नहीं लगेगा। बागवानों ने सरकार से उचित मुआवजा प्रदान कर राहत देने की मांग उठाई है।