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Rampur Bushahar News: वृतासुर का वध कर इंद्र ने जल देवता को किया मुक्त

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निरमंड में बूढ़ी दिवाली, लोगों ने रातभर प्राचीन और पारंपरिक गीत गाकर मनाया जश्न
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संवाद न्यूज एजेंसी
निरंमड(कुल्लू)। निरमंड में बूढ़ी दिवाली का पर्व शुरू हो गया। वीरवार रात को इंद्र और वृतासुर के बीच युद्ध का प्रदर्शन किया गया। इंद्र ने वृतासुर का वध कर जल देवता को मुक्त किया। निरमंड में बूढ़ी दिवाली (दियाउड़ी) पर्व मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। निरमंड की बूढ़ी दिवाली का जिक्र ऋग्वेद में भी आता है। रात को क्षेत्र के 12 गांवों के ग्रामीणों ने अग्नि को प्रज्वलित किया और इंद्र-वृतासुर युद्ध की रस्में निभाई गईं। इसमें रातभर लोगों ने प्राचीन और पारंपरिक गीत गाकर जश्न मनाया। ऋग्वेद के अनुसार, इंद्रदेव और वृतासुर के बीच काफी समय तक युद्ध हुआ था, जिसमें इंद्रदेव ने वृतासुर का वध कर विजयी प्राप्त की थी। कहते हैं कि पानी पर वृतासुर का आधिपत्य था, जबकि अग्नि पर इंद्रदेव का। पानी का आधिपत्य वृतासुर के पास होने पर लोग पानी के लिए त्राहि-त्राहि करने लगे। तब इंद्रदेव ने देवताओं के सहयोग से वृतासुर को युद्ध के लिए ललकारा। इसके बाद इन दोनो के मध्य भयंकर युद्ध हुआ और अंतत: मार्गशीष की अमावस्या को वृतासुर का वध कर जल देवता को मुक्त कर लोगों को राहत दी। इसके बाद इंद्र देवताओं के राजा बने। इस परंपरा को कायम रखने के लिए आज तक इस अमावस्या को दिवाली के रूप में मनाते हैं, जिसकी खुशी में लोग पूरी रात भर अग्नि प्रज्वलित कर अग्नि के चारों ओर प्राचीन लोकगीतों व वाद्ययंत्रों की थाप पर नृत्य करते रहे। परंपरा काफी प्राचीन होने के कारण इसे बूढ़ी दिवाली के नाम से जाना जाता है।
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