धर्म, शक्ति और परिवर्तन का वर्ष, कृषि उत्पादन होगा बेहतर : पंडित शशि पाल
संवाद न्यूज एजेंसी
कुमारसैन (रामपुर बुशहर)। वशिष्ठ ज्योतिष सदन के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित शशि पाल डोगरा ने कहा कि 19 मार्च से भारतीय पंचांग के अनुसार विक्रम संवत 2083 शुरू होगा। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाला यह नववर्ष धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्र भी आरंभ होंगे और घर-घर में विधि-विधान से माता दुर्गा की पूजा की जाएगी। पंडित डोगरा ने बताया कि प्रत्येक नवसंवत्सर में ग्रहों को विशेष पद दिए जाते हैं, जिनमें राजा और मंत्री का स्थान सबसे महत्वपूर्ण होता है। वर्ष 2083 में राजा गुरु (बृहस्पति) और मंत्री मंगल रहेंगे। गुरु को धर्म, ज्ञान, नीति और न्याय का कारक माना जाता है, जबकि मंगल ऊर्जा, साहस और पराक्रम का प्रतीक है। इन दोनों ग्रहों का संयुक्त प्रभाव वर्ष 2026–27 को विशेष बनाता है। उन्होंने बताया कि जब गुरु राजा होता है, तो वर्ष शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। इससे समाज में धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि होती है। मंदिरों में पूजा-अर्चना, यज्ञ-हवन और सांस्कृतिक आयोजनों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। शिक्षा, अनुसंधान और ज्ञान के क्षेत्रों में भी सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। विद्वानों और संतों का सम्मान बढ़ेगा। मंत्री मंगल के प्रभाव से शासन-प्रशासन में सक्रियता और तेजी देखने को मिलेगी। सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण और कठोर निर्णय लिए जा सकते हैं। सेना, पुलिस और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में मजबूती आएगी। साथ ही सड़क, भवन, ऊर्जा और उद्योग जैसे आधारभूत ढांचे के विकास कार्यों में गति आने के संकेत हैं। हालांकि, मंगल के प्रभाव से समय-समय पर राजनीतिक बहस और तनाव की स्थिति भी बन सकती है, लेकिन गुरु का संतुलन बड़े संकटों को नियंत्रित करेगा। उन्होंने कहा कि गुरु के प्रभाव से बारिश सामान्य से अच्छी रहने की संभावना है, जिससे कृषि उत्पादन बेहतर होगा। किसानों को लाभ मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। फल, सब्जियों और अनाज की पैदावार संतोषजनक रहने की उम्मीद है। युवाओं पर इस वर्ष का प्रभाव भी सकारात्मक रहेगा। मंगल की ऊर्जा युवाओं में उत्साह और प्रतिस्पर्धा बढ़ाएगी, जबकि गुरु उन्हें सही दिशा और विवेक प्रदान करेगा। खेल, तकनीक, सेना और प्रशासनिक क्षेत्रों में युवाओं की भागीदारी बढ़ सकती है। अंक ज्योतिष के अनुसार संवत 2083 का मूलांक 4 बनता है, जिसका स्वामी राहु है। राहु परिवर्तन और अप्रत्याशित घटनाओं का कारक माना जाता है। इसके प्रभाव से राजनीति और प्रशासन में नए निर्णय, गठबंधन और नीतिगत बदलाव देखने को मिल सकते हैं। धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी। बागवानी और कृषि से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा। कहा कि नव संवत 2083 धर्म, शक्ति और परिवर्तन का संतुलित वर्ष होगा, जिसमें विकास, सांस्कृतिक उत्थान और सामाजिक जागरूकता को नई दिशा मिल सकती है।