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Rampur Bushahar News: बारिश के बाद गुच्छी निकलने की बढ़ी उम्मीद, इस बार देर से शुरू होगा सीजन

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सर्दियों में कम हिमपात और सूखे के कारण नहीं मिल रही जंगलों में गुच्छी
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। क्षेत्र में हाल ही में हुई बारिश के बाद जंगलों में गुच्छी निकलने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। हर साल फरवरी से पहाड़ी जंगलों में गुच्छी दिखाई देने लगती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। जंगलों से गुच्छी पूरी तरह से गायब है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सर्दियों के दौरान कम हिमपात और लंबे समय तक सूखा रहने के कारण इस बार गुच्छी का सीजन अब जमीन में नमी आने के बाद देर से शुरू होगा। गुच्छी हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली एक दुर्लभ और बेहद महंगी मशरूम है। इसके उगने के लिए ठंडा मौसम, नमी और हल्की बारिश महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस वर्ष सर्दियों में अपेक्षाकृत कम बर्फबारी हुई, जिससे जंगलों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई। इस कारण फरवरी से गुच्छी नहीं निकल सकी। हालांकि, अब मार्च में हुई बारिश के बाद जंगलों में नमी बढ़ी है, जिससे लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही गुच्छी निकलना शुरू हो सकती है। स्थानीय लाेगों गुलाब सिंह, संत राम, विजय थापा, प्रकाश और मोती लाल का कहना है कि रोहड़ू और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गुच्छी ग्रामीणों की आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन है। आजकल गुच्छी के लोग सुबह से जंगलों की ओर निकल जाते थे। ग्रामीण जंगलों से गुच्छी इकट्ठा कर उसे सुखाते हैं और फिर बाजार में बेचते हैं। इससे उन्हें अच्छी आय प्राप्त होती है। गुच्छी की बाजार में काफी मांग रहती है। इसकी कीमत गुणवत्ता के अनुसार चार हजार रुपये से लेकर 15 हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। कई व्यापारी इसे स्थानीय लोगों से खरीदकर बड़े शहरों और बाहरी राज्यों के बाजारों में बेचते हैं, जहां इसकी मांग और भी अधिक रहती है। यदि आने वाले दिनों में मौसम में नमी बनी रहती है और बीच-बीच में बारिश होती है, तो जंगलों में गुच्छी की अच्छी पैदावार हो सकती है। इससे ग्रामीणों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है और देर से ही सही, लेकिन इस साल यदि बारिश नमी रही तो गुच्छी का सीजन अच्छा रहने की संभावना जताई जा रही है।
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