. 2014 से 2018 तक बांटे गए 500 पट्टे, 6 मामलों का हुआ संयुक्त निरीक्षण : नेगी
. भाजपा की संकीर्ण विचारधारा से किन्नौर के लोगों में नौतोड़ को लेकर रोष
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)।
जनजातीय क्षेत्रों के लोगों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ अब किन्नौर के अंतिम गांव सुमरा से नौतोड़ अधिकार यात्रा शुरू की जाएगी। यह यात्रा किन्नौर के गांव-गांव पहुंचेगी। इसके तहत लोगों को नौतोड़ के अधिकार के प्रति जागरूक किया जाएगा। नौतोड़ के लंबित मामलों को लेकर राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने भाजपा पर निशाना साधा है। रिकांगपिओ में आयोजित प्रेसवार्ता में जगत सिंह नेगी ने कहा कि नौतोड़ नियम के तहत पात्र व्यक्ति, जिसके पास 20 बीघे से कम जमीन है, उसे 20 बीघे तक जमीन देने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट-1980 के कारण नौतोड़ देने में दिक्कत आती है, लेकिन संविधान के अनुच्छेद-5 के तहत जनजातीय क्षेत्रों के हितों की रक्षा के लिए राज्यपाल को विशेष शक्तियां प्राप्त हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से 2018 के बीच कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन राज्यपाल ने अनुच्छेद-5 के तहत फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट-1980 को निलंबित कर जनजातीय क्षेत्रों में नौतोड़ देने की प्रक्रिया शुरू की थी। इस दौरान एक ही दिन में रिकांगपिओ में करीब 500 पट्टे बांटे गए और छह हजार से अधिक मामलों का संयुक्त निरीक्षण किया गया। नेगी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद नौतोड़ के मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। वर्ष 2018 में केवल एक व्यक्ति को नौतोड़ स्वीकृत किया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में कांग्रेस ने तत्कालीन जिला अध्यक्ष उमेश नेगी की अध्यक्षता में किन्नौर के तीनों ब्लॉकों में एक माह का आंशिक हड़ताल आंदोलन किया था। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रतिनिधिमंडल को शिमला बुलाकर फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट की अवधि को एक वर्ष बढ़ाने की मंजूरी राज्यपाल से दिलाई। इसके बावजूद नौतोड़ का एक भी मामला स्वीकृत नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 से वह लगातार राज्यपाल से इस मामले को लेकर मिलते रहे हैं। पूर्व राज्यपाल से वह स्वयं आठ बार मिले, जबकि जनजातीय सलाहकार परिषद के सदस्य भी उनके साथ रहे। उन्होंने कहा कि करीब साढ़े तीन साल तक आश्वासन मिलने के बावजूद नौतोड़ का मामला आगे नहीं बढ़ सका। वर्तमान राज्यपाल से भी वह अब तक दो बार मुलाकात कर चुके हैं। मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि किन्नौर के लोगों में नौतोड़ को लेकर भारी रोष है। भाजपा की संकीर्ण विचारधारा के कारण राज्यपाल को प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि नौतोड़ न मिलने का कारण उनका व्यवहार बताए जाने की बात कही गई है, जबकि वह इस मामले को लेकर लगातार कानूनी और संवैधानिक तरीके से प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नौतोड़ अधिकार यात्रा किन्नौर के अंतिम गांव सुमरा से शुरू होकर जिले के विभिन्न गांवों तक जाएगी। इसके बाद शिमला पहुंचकर राज्यपाल से एक बार फिर नौतोड़ के मामलों को स्वीकृति देने की गुहार लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद स्पीति, लाहौल, पांगी और भरमौर में भी नौतोड़ अधिकार यात्रा शुरू की जाएगी। अंत में शिमला में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास बैठकर अन्याय के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लिया जाएगा।