पंचायत प्रधानों से इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजने की अपील की
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब उत्पादक क्षेत्रों में कीटनाशकों, फफूंदनाशकों, खाद, उर्वरकों, मिट्टी और पत्तियों की वैज्ञानिक जांच के लिए आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित करने की मांग उठी है। हिमालय एप्पल ग्रोवर्स सोसायटी के महासचिव राजेश धानटा और बागवानों ने यह मांग उठाई है। उन्होंने सभी पंचायत प्रधानों से इस बारे में प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजने की अपील की है। पिछले तीन वर्षों से सेब के बगीचों में पत्तियों में विभिन्न बीमारियों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। बागवानों की ओर से विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार दवाओं का छिड़काव करने के बावजूद रोगों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। इस कारण पत्तियां समय से पहले पीली होकर झड़ रही हैं। इस समस्या से इस वर्ष सेब उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। महासचिव राजेश धानटा ने आशंका जताई है कि बाजार में उपलब्ध कुछ कीटनाशकों, फफूंदनाशकों और उर्वरकों की गुणवत्ता में कमी हो सकती है। उन्होंने नकली उत्पादों की समस्या की भी आशंका व्यक्त की। धानटा ने कहा कि इसकी पुष्टि केवल वैज्ञानिक जांच से ही संभव है, इसलिए सेब उत्पादक क्षेत्रों में अत्याधुनिक परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करना समय की आवश्यकता है। यह कदम बागवानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि नंदपुर पंचायत की प्रधान शकुंतला डोड की अध्यक्षता में इस संबंध में एक प्रस्ताव पहले ही पारित किया जा चुका है। यह अन्य पंचायतों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका इसमें अहम होगी। राजेश धानटा ने उम्मीद जताई कि पंचायत प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और बागवानों के संयुक्त प्रयास से यह मांग सरकार तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में सेब बागवानी को वैज्ञानिक आधार पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे। यह पहल सेब उत्पादकों की समस्याओं का स्थायी समाधान प्रदान करेगी। इससे क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। बागवानी क्षेत्र में आधुनिकता लाना समय की मांग है।