रविवार को दो दिवसीय दखरोड़ मेले के समापन के बाद देवता साहिब फांचा से विदाई लेते देवता साहिब दमुख
सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर लौटे देवता साहिब दमुख
. देव विदाई के साथ फांचा में दखरोड़ मेला संपन्न
. मेले में ढोल-नगाड़ों की थाप पर चला नाटियों का दौर
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर/डंसा। 15/20 घाटी के फांचा में ऐतिहासिक दखरोड़ मेला देव विदाई के साथ संपन्न हो गया। रविवार को नोगवैली के देवता साहिब दमुख डंसा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर अपने देवालय लौटे। फांचा में देवता साहिब जाख और देवता साहिब दमुख के सानिध्य में पारंपरिक मेला धूमधाम से मनाया गया। नोगवैली के अधिष्ठाता देवता साहिब रविवार को 15/20 घाटी के दौरे से वापस आए। फांचा में दो दिन तक दखरोड़ मेले में दिनभर नाटियों का खूब दौर चला। ग्रामीणों, महिलाओं और देवलुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सजधज कर ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाटी डाली। ग्रामीणों ने मंदिर में देवताओं के समक्ष शीश नवाया और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया। दोपहर बाद देवता साहिब दमुख डंसा अपने देवालय लौटे। मंदिर कमेटी, महिलाओं और ग्रामीणों ने देव विदाई दी। लोग इस दौरान काफी भावुक भी हुए। परशुराम मंदिर समिति डंसा के अध्यक्ष खेल चंद नेगी और महासचिव जीएल डमालू ने कहा कि फांचा में आयोजित दखरोड़ मेले से देवता साहिब दमुख डंसा अपने मंदिर लौट गए हैं। मेले में ग्रामीणों, महिलाओं और देवलुओं ने पारंपरिक नाटी डालकर भावी पीढ़ी को संस्कृति संजोने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मेले हमारी समृद्ध संस्कृति, सभ्यता और ऐतिहासिक विरासतों के परिचायक हैं। ये आयोजन न केवल हमारी प्राचीन कला, संगीत और हस्तशिल्प को जीवंत रखते हैं, बल्कि लोगों के बीच आपसी भाईचारा और सामाजिक सौहार्द भी बढ़ाते हैं।