निजी दुकानों से महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। सेब के बगीचों में इन दिनों माइट (लाल मकड़ी) का प्रकोप शुरू हो गया है। इससे बागवानों की चिंता बढ़ गई है। सरकारी उद्यान केंद्रों में माइट की रोकथाम के लिए आवश्यक दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण बागवानों को निजी दुकानों से महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। इससे उनकी लागत बढ़ गई है। बागवानों का कहना है कि इस वर्ष सेब की फसल पहले ही कम है। ऐसे में माइट का बढ़ता प्रकोप फसल के लिए एक नई चुनौती बन गया है। बागवान लगातार अपने बगीचों में माइट नियंत्रण के लिए छिड़काव कर रहे हैं। बागवान सुरेंद्र शर्मा, नीरज ठाकुर, सूरत राम और हरदयाल ने बताया कि माइट पत्तियों का क्लोरोफिल चूस लेती है। इससे पत्तियां कमजोर हो जाती हैं। इससे पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्षमता प्रभावित होती है। इसका सीधा असर फलों के विकास पर पड़ता है। यदि समय रहते माइट पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो फलों का विकास रुक सकता है। अधिक प्रकोप होने पर फल समय से पहले झड़ने भी लगते हैं। बागवानों ने उद्यान विभाग से जल्द दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग की है। माइट की रोकथाम के लिए समय-समय पर छिड़काव करना आवश्यक है। इसकी दवाइयां पहले से ही काफी महंगी हैं। सरकारी उद्यान केंद्रों में अनुदान पर दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। बागवानों को निजी दुकानों से अधिक कीमत चुकाकर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। बागवानों ने उद्यान विभाग से जल्द से जल्द आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग की है।