रोहड़ू। बागवानों ने यूनिवर्सल कार्टन पर जल्दबाजी में विधेयक न लाने की मांग उठाई है। फेडरेशन ऑफ एप्पल ग्रोवर ऑफ एचपी की एक विशेष बैठक कोटखाई में आयोजित हुई। बैठक में ग्रोवर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भाग लिया। इस मौके पर सरकार द्वारा लाए जा रहे यूनिवर्सल कार्टन को अनिवार्य किए जाने वाले प्रस्तावित विधेयक पर गहन चर्चा की गई। बैठक में सर्वसम्मति से मांग उठाई गई कि बागवानों की भलाई के लिए लाए जा रहे विधेयक को विधानसभा में पेश करने में जल्दबाजी न की जाए।
यूनिवर्सल कार्टन को अनिवार्य बनाए जाने के लिए प्रदेश सरकार ने विधानसभा में विधेयक लाने का मन बना लिया है। लेकिन प्रदेश सरकार के इस फैसले से बागवानों में अभी डर और संशय की स्थिति बनी हुई है। बागवानों ने बैठक आयोजित कर सरकार के फैसले पर चर्चा की है। चर्चा के दौरान बागवानों ने शंका जाहिर की कि यूनिवर्सल कार्टन लागू करने से प्रति कार्टन लागत 30% तक बढ़ जाएगी, उसकी भरपाई कैसे होगी। क्या सरकार इस विषय को विधेयक में लाएगी। 60% सेब बी-ग्रेड, सी-ग्रेड, रैड गोल्डन, गोल्डन या अन्य वैरायटी का होता है। 20 किलो की पैकिंग में इसे बेचना मुश्किल हो जाएगा, सरकार इस नुकसान की भरपाई कैसे करेगी। सेब की पेटी के भाड़े को वजन के आधार पर किया जाना चाहिए। इसे यूनिवर्सल कार्टन के साथ विधेयक का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। बागवानों को मंडियों में लेबर के नाम पर ठगा जा रहा है। इस विषय को भी विधेयक का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। बागवान चाहते हैं कि ऐसा ही विधेयक उत्तराखंड और कश्मीर में भी लाने की कवायद की जाए। बागवानों का सुझाव है कि विधेयक लाने से पहले सभी बागवान संगठनों से सरकार को विचार विमर्श करना चाहिए। इस मौके पर रणवीर झोहटा, राजन काल्टा, अंकित ठाकुर, अरुण शर्मा, कुलदीप बरागटा, अक्षय चंदेल, विशाल बेगटा, इंद्र पिरटा, अमर धांटा, विक्रम नेगी, कुनाल, सुरेंद्र सिंह ठाकुर, हरिचंद, विरेंद्र, अमित जस्टा, महेंद्र सिंह, संदीप परमार, योगेश परमार, पंकज गांगटा, पंकज चौहान, विजय चौहान, हरीश कुमार सहित कई बागवान उपस्थित थे।