ढोल-नगाड़ों की थाप और पारंपरिक गीत गाकर मनाया जा रहा ऐतिहासिक मेला
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देवता साहिब रापुक शंकर का लिया आशीर्वाद, अच्छी फसल के लिए पूजा की
संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिले के दुर्गम क्षेत्र ठंगी में ऐतिहासिक माघ मेला धूमधाम से मनाया जा रहा है। सोमवार को मेले में ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में नाटी डाली और ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक गीत गाकर खूब झूमे। ठंगी में पांच दिन से ऐतिहासिक माघ मेला चल रहा है। मेले में जहां वाद्ययंत्रों की धुनों पर नाटियों का दौर चलाया जा रहा है, वहीं भावी पीढ़ी को अपनी संस्कृति संजोने का संदेश दिया जा रहा है। हजारों लोगों ने देवता साहिब रापुक शंकर का आशीर्वाद प्राप्त किया और वर्षभर अच्छी फसल के लिए पूजा-अर्चना की। सोमवार को फलदार पेड़ के फल को देवता साहिब के चरणों में रखा गया और आने वाले वर्ष में अच्छी फसल की कामना के लिए पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में धूप लेकर देवता साहिब की पूजा की। मंगलवार से सबसे बड़ा पर्व सावन कायाड़ का शुभारंभ होगा। वर्ष में जो पहला बच्चा होगा, उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर हलुआ और होद की पूजा की जाती है। देवता के शु माथास तीन गुर तै शु चौडरी लगाकर इस पर्व का आगाज किया जाएगा। तीन गुर खांडो कायाड़ लगाते हैं और इसके बीच देवता रापुक शंकर के पुजारी उनके सहयोगी तीनों माली सावने थानाड़ से पूजा पाठ कर धीरे-धीरे सानताड़ में प्रवेश करते हैं। तीनों मालियों को जगाया जाता है। पुजारी तीन गुर कार कायाड़ लगाया जाता है। सावने कायाड़ा का अपना विशेष महत्व है। आठ दिवसीय इस मेले में बौद्ध भिक्षु महान ग्रंथों का पाठ कर गांव में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। पुजारी धन सिंह, माथास पंकज राठौर और पूर्व पंचायत प्रधान ठंगी सत्य प्रकाश बोरस ने कहा कि पारंपरिक ऐतिहासिक मेला धूमधाम से मनाया जा रहा है।
माघ पर्व पर किन्नौर जिले के ठंगी में देवता रापुक शंकर के सानिध्य में ग्रामीणों ने लगाई नाटी। सं
माघ पर्व पर किन्नौर जिले के ठंगी में देवता रापुक शंकर के सानिध्य में ग्रामीणों ने लगाई नाटी। सं
माघ पर्व पर किन्नौर जिले के ठंगी में देवता रापुक शंकर के सानिध्य में ग्रामीणों ने लगाई नाटी। सं