कुई पंचायत के पास नहीं है अपना भवन, ग्रामीणों ने सरकार से शीघ्र निर्माण की उठाई मांग
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संवाद न्यूज एजेंसी कुमारसैन (रामपुर बुशहर)। नारकंडा की नवगठित कुई पंचायत की पहली ग्राम सभा सोमवार को पेड़ के छांव के नीचे हुई। ग्राम सभा में सभी प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भाग लेकर पंचायत के विकास की रूपरेखा बनाई। पंचायत के पास अभी तक अपना भवन नहीं है, इसलिए ग्रामीणों को खुले में पेड़ों की छांव के नीचे बैठना पड़ा। ग्राम सभा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। ग्राम सभा में पंचायत भवन के अभाव को क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या बताया और सरकार से शीघ्र स्थायी भवन के निर्माण की मांग उठाई। पंचायत भवन न होने से बैठकों, सरकारी योजनाओं की समीक्षा, प्रमाणपत्रों से संबंधित कार्यों और अन्य प्रशासनिक गतिविधियों के संचालन में लगातार दिक्कतें आ रही हैं।
बरसात और सर्दियों के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है, जिससे पंचायत का नियमित कार्य प्रभावित होता है। पंचायत प्रधान अंकिता वर्मा, उपप्रधान भूपेंदर मेहता, अन्य निर्वाचित सदस्यों रविंद्र, गीता, सुमन और मीरा ने बताया कि पंचायत के सुचारु संचालन के लिए स्थानीय समाजसेवी उमा नंद ने स्वेच्छा से अपने दो कमरे निशुल्क उपलब्ध करवाए थे ताकि पंचायत का कार्यालय और अन्य आवश्यक कार्य बिना किसी बाधा के संचालित किए जा सकें, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने इस व्यवस्था को लेकर शिकायतें दर्ज करवाईं। इसके बाद मामला पंचायतीराज विभाग के संबंधित कार्यालय तक पहुंच गया। इससे पंचायत के नियमित कार्यों में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न हुईं और लोगों की परेशानी बढ़ गई। ग्राम सभा में वक्ताओं ने कहा कि जब तक पंचायत का अपना भवन तैयार नहीं हो जाता, तब तक पंचायत के कार्यों के संचालन के लिए स्थानीय लोगों के सहयोग को सकारात्मक दृष्टि से देखा जाना चाहिए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बेवजह की शिकायतों के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जबकि पंचायत प्रतिनिधियों का उद्देश्य केवल लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। बैठक में निर्णय लिया गया कि पंचायत भवन के निर्माण तक ग्राम पंचायत की सभी प्रशासनिक और विकासात्मक गतिविधियां स्वेच्छा से उपलब्ध किराये के कमरों में ही संचालित की जाएंगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि इस व्यवस्था में किसी भी विभाग का अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए ताकि पंचायत का कार्य सुचारु रूप से चलता रहे और ग्रामीणों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।