ठियोग में एनएच पांच किनारे जंगल में ठिकाने लगाया जा रहा कबाड़, विभाग बेखबर। संवाद
वन विभाग कार्यालय से दो सौ मीटर दूरी पर ठिकाने लग रहा कबाड़
रात के समय ट्रक में भरकर भेजा जाता है कबाड़
एकत्रित कबाड़ फैल रहा जंगलों में, वन विभाग बैठा आंखें मूंदे
सुनील ग्रोवर
ठियोग (रामपुर बुशहर)। प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं ठियोग के जंगल की सुंदरता पर कबाड़ का ग्रहण लग रहा है। वन विभाग के कार्यालय से मात्र दो सौ मीटर की दूर जंगल में कबाड़ रखा जा रहा है, जो जंगल को प्रदूषित कर रहा है। रात के अंधेरे में यह कबाड़ ट्रक में भरकर भेजा जा रहा है और वन विभाग आंखें मूंदे बैठा है। शहर के कबाड़ी बढि़याना जंगल की भूमि पर एनएच-पांच की मुख्य सड़क के किनारे अवैध रूप से खुले आसमान के नीचे अपना कबाड़ रख रहे हैं। कबाड़ियों ने एनएच की निचली तरफ जंगल के साथ कबाड़ रखने की जगह बना रही है, जिससे जंगल की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। इस सड़क पर कस्बे के आम लोग अपने वाहन भी पार्क करते हैं, लेकिन किसी ने भी जंगल की भूमि पर अवैध रूप से रखे जा रहे कबाड़ की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। वहीं, वन विभाग और आम नागरिकों की अनदेखी का कबाड़ी फायदा उठा रहे हैं। कबाड़ियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि रात के समय वे खुले आसमान के नीचे बनाए कबाड़ के इस गोदाम से सरेआम एनएच किनारे ट्रक खड़ा कर कबाड़ को भरते हैं। कई बार खुले में रखा कबाड़ तेज हवा के साथ नीचे की तरफ के जंगल में फैल जाता है और बहुमूल्य जंगली संपदा को नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा कबाड़ियों ने वन विभाग की लगाई फेंसिंग को भी नुकसान पहुंचाया है। वहीं, फेंसिंग के भीतर झोपड़ीनुमा रिहायश भी बना रखी है। हालांकि, इन दिनों ये किसी और जगह पर रहते हैं, लेकिन कबाड़ को रखने वाली जगह पर उन्होंने अपना कब्जा छोड़ा नहीं है। कबाड़ी जंगली भूमि पर बड़े-बड़े बोरों में प्लास्टिक और शीशे का सामान रखते हैं और गत्ता व अन्य सामग्री खुले में फेंक देते हैं। वन विभाग के लापरवाही के कारण अवैध रूप से चल रहा यह धंधा फल फूल रहा है और जंगल में प्रदूषण फैला रहा है। वहीं, वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का इस ओर ध्यान नहीं है।
एनएच किनारे सटे जंगल में कबाड़ रखने का मामला संज्ञान में आया है। जल्द ही वन भूमि को खाली करवाया जाएगा। - मनीष रामपाल, डीएफओ, वन विभाग