रोहड़ू। उपमंडल रोहड़ू के पब्बर नदी में अवैध खनन नहीं थम रहा है। सरकार अवैध खनन को रोकने के लिए करोड़ों रुपये खर्च चुकी है। इसके बाद नदी में अवैध खनन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। करीब 45 किलोमीटर के पब्बर तट पर अवैध और अवैज्ञानिक खनन दिन के समय कम रात को अधिक चल रहा। नदी तट पर खनन के लिए रात को मशीनों का खुला उपयोग हो रहा है। रेत, पत्थर नदी से ट्रक और ट्रैक्टर में निकाले जा रहे हैं। पहले प्रदेश न्यायालय अवैज्ञानिक खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के आदेश दे चुका है। पब्बर नदी के तटवर्ती गांव संदौर, समोली, मांदली के साथ नदी के बहाव से भूमि कटाव बढ़ता जा रहा है। भूमि कटान को रोकने के लिए सरकार लाखों रुपये खर्च कर चुकी है। इसी पब्बर नदी के तट से करीब दो दर्जन उठाऊ पेजयल योजनाओं को अवैध खनन से नुकसान पहुंच रहा है। समोली गांव के साथ नदी तट पर डंपिंग और खनन को लेकर जिला परिषद के उपाध्यक्ष सुरेंद्र रेटका सहित कई लोग सरकार को ज्ञापन भेज चुके हैं। लोगों ने बताया कि रात के समय नदी में हो रहे खनन से रोहड़ू के साथ उनके खेतों को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से कई बार कार्रवाई की गई। रास्ते नदी तट के लिए बंद किए गए, लेकिन कुछ दिन बाद रास्ते दोबारा खोल दिए गए हैं। पुलिस कई बार कार्रवाई कर चुकी है, लेकिन खनन से जब्त रेत, पत्थर को रखने के लिए स्थान उपलब्ध नहीं होने के कारण अब पुलिस के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
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पब्बर नदी के लिए रास्तों को लगातार बंद किया जा रहा है। दिन के समय इस पर निगरानी भी रखी जाती है। एक जगह पर जल शक्ति विभाग नदी तट पर टैंक का निमार्ण कर रहा है। दूसरी जगह एक व्यक्ति को खनन के लिए सरकार से लीज मिली हुई है। यदि कोई रास्ते खोल दिए गए, तो उनको दोबारा बंद किया जाएगा। कमलेश भारद्वाज, खनन अधिकारी