कोटला गांव में बैठक के दौरान चर्चा करते विस्थापित। संवाद
कोटला के विस्थापितों ने 22 को प्रस्तावित बैठक न होने पर जताया रोष
एसडीएम ने राजस्व व परियोजना के अधिकारियों के साथ दिया था बैठक का आश्वासन
नाथपा-झाकड़ी परियोजना की अर्जित जमीन पर गुज्जर समुदाय और बाहरी लोगों को बसाने का विरोध
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्यूरी(रामपुर बुशहर)। देश की सबसे बड़ी भूमिगत नाथपा-झाकड़ी जल विद्युत परियोजना के निर्माण को अर्जित भूमि गुज्जर समुदाय और बाहरी लोगों को देने के विरोध के बाद 22 नवंबर को बैठक न बुलाने से कोटला से ग्रामीणों में रोष है। आश्वासन के बाद भी बैठक न होने पर कोटला विस्थापित कल्याण मंच ने नाराजगी जताई। शनिवार को ग्रामीणों ने कोटला में बैठक की। बैठक में ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 30 नवंबर तक बैठक कर विस्थापित ग्रामीणों की मांगें नहीं मानी गईं, तो ग्रामीण आंदोलन करेंगे। 6 नवंबर को कोटला के विस्थापितों ने रामपुर में एसडीएम कार्यालय को घेराव किया था। विस्थापित कल्याण मंच कोटला ने एसडीएम हर्ष अमरेंद्र सिंह के माध्यम से राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा था, जिसमें कोटला में परियोजना की जमीन पर गुज्जर समुदाय और बाहरी लोगों को बसाने पर एतराज जताया था। ग्रामीणों ने इस फैसले को वापस लेने और विस्थापितों की जमीन उन्हें लौटाने की मांग उठाई है। शनिवार को ग्रामीणों ने बैठक कर रोष जताते हुए जल्द समस्या के समाधान की मांग उठाई। ग्रामीणों ने कहा कि इस जमीन पर नियमानुसार यहां के स्थानीय लोगों का अधिकार है। उपयोग में न लाई गई जमीन को स्थानीय विस्थापित परिवारों को लौटाना चाहिए, क्योंकि इस जमीन पर पहला हक उनका ही है। सरकार ने इसके विपरीत चतुराई से लोगों की यह भूमि राजस्व विभाग के नाम कर दी। अब यह गुज्जर समुदाय और बाहरी लोगों को दी जा रही है। परियोजना निर्माण के लिए पूरा गांव विस्थापित किया गया था, लेकिन 8-10 लोगों को ही नौकरियां दी गई। ग्रामीणों ने कहा कि गुज्जर समुदाय को यहां बसाने से स्थानीय लोगों के सारे हक खत्म हो जाएंगे। इस मौके पर कोटला ग्राम विस्थापित कल्याण मंच के अध्यक्ष कृष्ण वर्मा, सचिव धर्म सेन मेहता, कोटला वार्ड सदस्य नीलम लश्टी, राजेंद्र नेगी, केवल राम, अविनाश, अमर सिंह, राजेंद्र खन्ना, मंगल दास, शकुंतला देवी, सुषमा सुनेल, ज्ञान दासी सहित अन्य मौजूद रहे।