दत्तनगर में सैकड़ों पशुपालकों ने मिल्क प्लांट के बाहर किया प्रदर्शन
जल्द समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो होगा उग्र आंदोलन
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। बीते लंबे समय से दुग्ध उत्पादक लंबित समस्याओं को लेकर संघर्षरत हैं, लेकिन सरकार समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है। दुग्ध उत्पादकों को न तो दूध का उचित मूल्य मिल रहा है और न ही समय पर भुगतान हो रहा है। अपनी मांगों को लेकर सोमवार को निरमंड, रामपुर, ननखड़ी, आनी और नारकंडा के सैकड़ों पशुपालकों ने रोष प्रदर्शन किया। दत्तनगर मिल्क प्लांट के बाहर पशुपालकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन उग्र किया जाएगा। इस मौके पर माकपा नेता राकेश सिंघा, डॉ. ओंकार शाद, पूर्ण ठाकुर, देवकी नंद, कृष्णा राणा, वीना देवी, प्रेम लता, सुषमा देवी, हेम राज, गीता राम, दुर्गा, सुभाष, तुला राम और सुनीता सहित कई अन्य मौजूद रहे।
हिमाचल प्रदेश दुग्ध उत्पादक संघ के राज्य संयोजक प्रेम चौहान और राज्य सह संयोजक रणजीत ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की 90 प्रतिशत आबादी गांव में रहती है। कृषि और बागवानी यहां का मुख्य व्यवसाय है। पशु पालन भी ग्रामीणों की आजीविका का साधन है, लेकिन पशुपालन और पशुपालक आज भी हाशिये पर हैं। उनकी सुनवाई न के बराबर है और सरकार भी इनकी समस्याओं पर गंभीर नहीं है। आज के समय में जो किसान पशुपालन से जुड़े हैं और अपनी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए दूध बेचते हैं, उन्हें दूध का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है।
ये मांगें उठाईं
प्रदेश सरकार ने दूध के दाम एक अप्रैल के बाद जिसमें 3.3 प्रतिशत फैट व 7.3 प्रतिशत एसएनएफ होगा, उसका दाम 30.57 रुपये और 5.5 प्रतिशत फैट, 8.5 प्रतिशत एसएनएफ होगी, उसका दाम 47.93 रुपये तय किया है। सरकार की ओर से तय किए गए रेट के आधार पर आज भी दुग्ध उत्पादकों को सही दाम नहीं मिल रहे हैं। प्रदर्शन के माध्यम से पशुपालकों ने सरकार की ओर से घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने, सभी दुग्ध सोसायटियों में दूध की गुणवत्ता को मापने के टेस्टिंग मशीन देने, दूध की पेमेंट हर माह 10 तारीख से पहले देने, सभी सोसायटियों में फीड उपलब्ध करवाने और दत्तनगर मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का कार्य शीघ्र पूरा करने की मांग उठाई है।