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हिमाचल सरकार का कर्मचारियों के हायर ग्रेड पे वापस लेना तानाशाही निर्णय : डोगरा

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संवाद न्यूज एजेंसी
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रोहड़ू। हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से जारी अधिसूचना पर प्रदेश के कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है। वित्त (वेतन पुनरीक्षण) विभाग ने अधिसूचना जारी कर हिमाचल प्रदेश सिविल सर्विसेज (संशोधित वेतन) नियम, 2022 में जोड़े गए नियम 7 ए को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है, जो एक तानाशाही निर्णय है। यह बात राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी संघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष विपिन डोगरा ने कही। डोगरा ने कहा कि नियम 7 ए के तहत क्लर्क, जूनियर ऑफिस, एसिस्टेंट आईटी, स्टाफ नर्स समेत कई श्रेणियों के कर्मचारियों को दो वर्ष की नियमित सेवा पूरी करने पर उच्च चरण का वेतनमान देकर वेतन का निर्धारण किया जाता था। अब इस प्रावधान को हटा दिया गया है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियम 7 ए के तहत पहले से हुआ अतिरिक्त भुगतान वापस नहीं लिया जाएगा। इस नियम को हटाना कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ और अन्याय है। जब केंद्र और अन्य राज्यों में कर्मचारियों को समान वेतन लाभ मिल रहे हैं। हिमाचल में यह प्रावधान खत्म करना पूरी तरह भेदभावपूर्ण है। यह कदम कर्मचारियों की वित्तीय प्रगति को रोकने वाला है और इसे कर्मचारी वर्ग किसी भी सूरत पर स्वीकार नहीं करेगा। पेंशनर महासंघ के प्रदेश महामंत्री बृज लाल शर्मा, राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय मंत्री चमन कलवान, उपाध्यक्ष गोपाल दत्त ने बताया कि यह निर्णय कर्मचारी विरोधी और तानाशाहीपूर्ण है। महासंघ इसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हुए सरकार से अविलंब निर्णय वापस लेने की मांग करता है। सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों में सनसनी फैलाने का है, ताकि कर्मचारी डीए, एरियर और अन्य भुगतान की मांग का दबाव न डाले।
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