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Rampur Bushahar News: ऊंचे इलाकों में सेब की अच्छी पैदावार की उम्मीद

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सेब बगीचों में फूलों की बहार
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फूल अवस्था में रासायनिक स्प्रे से बचने की हिदायत
मधुमक्खियों की गतिविधि पर निर्भर है परागण प्रक्रिया
मैनकोजेब और कैप्टान से स्कैब रोग पर नियंत्रण संभव
इमिडाक्लोप्रिड और थायोमेथोक्साम के सीमित उपयोग की सलाह
मौसम के अनुसार स्प्रे और खेत में नमी बनाए रखना जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। ऊंचाई वाले इलाकों में इन दिनों सेब के पेड़ों पर फूल खिलने शुरू हो गए हैं। मौसम अनुकूल रहने से अच्छी पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है। ठंड का संतुलित असर और समय पर धूप मिलने से पौधों की वृद्धि बेहतर हो रही है। इससे इस बार ऊंचे क्षेत्रों में सेब की अच्छी पैदावार के आसार हैं।
सेब बहुल क्षेत्रों के कम ऊंचाई वाले इलाकों में हाल ही में हुई बारिश ने फूलों को नुकसान पहुंचाया है। कई स्थानों पर फूल झड़ने और परागण प्रभावित हुआ है। इससे उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि फूल खिलने का समय अत्यंत संवेदनशील होता है। बागवानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बागवानी विभाग के अनुसार, फूल आने की अवस्था में किसी भी प्रकार का रासायनिक स्प्रे नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे फूल झड़ सकते हैं। फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इस दौरान मधुमक्खियों की गतिविधि भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं, इसलिए रसायनों का प्रयोग नुकसानदेह साबित हो सकता है।
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फूल झड़ने (पेटल फॉल स्टेज) के बाद बागवान दवाइयों का छिड़काव कर सकते हैं। इससे रोगों और कीटों से बचाव के साथ बेहतर फल गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्कैब रोग से बचाव के लिए मैनकोजेब या कैप्टान का छिड़काव किया जा सकता है। एफिड और अन्य कीटों के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड या थायोमेथोक्साम का सीमित मात्रा में उपयोग करने की सलाह दी गई है। स्प्रे के साथ स्टिकर मिलाने से दवा का प्रभाव बढ़ता है और पत्तियों पर उसका टिकाव बेहतर रहता है।
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बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ ने बागवानों को सलाह दी है कि वे मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही स्प्रे करें। दवाइयों का अधिक मात्रा में उपयोग न करें। साथ ही खेत में नमी बनाए रखना और समय-समय पर निरीक्षण करना जरूरी है, ताकि किसी भी रोग या कीट का प्रारंभिक अवस्था में ही नियंत्रण किया जा सके।
यदि मौसम इसी तरह अनुकूल बना रहा, तो ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब की फसल बेहतर रहने की उम्मीद है, जिससे बागवानों को अच्छी आमदनी मिल सकती है।
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