सूखे के कारण सेब के पौधों में नजर आ रहा असर। संवाद
बागवानों को वर्षा बारिश का इंतजार करना चाहिए : चौहान
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। बीते चार महीने से बागवान सूखे की मार झेल रहे हैं। लंबे समय से बारिश और बर्फबारी न होने के कारण सेब के बगीचों में तौलिए बनाने का कार्य करना बागवानों के लिए मुश्किल हो गया है। बागवानी विशेषज्ञ भी सूखे में तौलिए न करने की सलाह दे रहे हैं। इससे सेब की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। सर्दियों में बागवान सेब के बगीचों में आवश्यक कार्य करते हैं। बागवान इन दिनों सेब की काट-छांट और तौलिए बनाने के कार्य में जुटे हुए हैं। सूखे के चलते बगीचों में तौलिए बनाना मुश्किल हो गया है। तौलिए बनाने के लिए यह उपयुक्त समय चल रहा है। इन दिनों बागवान पौधों की जड़ों को साफ करने का कार्य भी करते हैं, ताकि पौधों की जड़ों को बोरर कीट से बचाया जा सके। इस कारण कई बागवान सूखे में ही सख्त मिट्टी को खोदकर तौलिए बनाने का कार्य कर रहे हैं, लेकिन सूखे में तौलिए बनाना सेब की जड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। सख्त मिट्टी खोदने से पौधे की जड़ों को भी नुकसान हो सकता है। बागवानी विशेषज्ञ बारिश के बाद नमी होने पर तौलिए बनाने व जड़ों को साफ करने की सलाह दे रहे हैं। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. संजय चौहान ने बताया कि तौलिए बनाने के लिए यह उपयुक्त समय है, लेकिन भूमि में पर्याप्त नमी न होने के कारण तौलिए बनाना सही नहीं है। सूखे में तौलिए करने से पौधों की जड़ों को नुकसान हो सकता है। बागवानों को बारिश का इंतजार करना चाहिए। भूमि में नमी आने के बाद ही तौलिए बनाने का कार्य करें।